रोहतास। बिहार की सियासत में एक बार फिर बड़ा पॉलिटिकल ट्विस्ट आने वाला है। सत्ता के गलियारों में हलचल तेज है, बयानबाज़ी गर्म है और अंदरखाने रणनीतियाँ अपने चरम पर हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दिल्ली दौरा अब सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रह गया है—बल्कि इसे बिहार में सत्ता परिवर्तन की पटकथा का अहम अध्याय माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार 9 अप्रैल की शाम पटना से दिल्ली रवाना होंगे और 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेंगे। लेकिन असली कहानी शपथ से ज्यादा उन मुलाकातों में छिपी है, जो दिल्ली में होने वाली हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से संभावित मुलाकात को लेकर सियासी गलियारों में कयासों का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो ये मुलाकातें महज शिष्टाचार नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता का अगला चेहरा तय करने वाली निर्णायक बैठकों में बदल सकती हैं। करीब दो दशक तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार अब एक नई भूमिका में नजर आ सकते हैं—लेकिन क्या यह उनके मुख्यमंत्री पद से विदाई का संकेत है? जैसे ही नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ लेंगे, वैसे ही उनके इस्तीफे की अटकलों पर मुहर लग सकती है। और यहीं से शुरू होगा बिहार में नए नेतृत्व की तलाश का बड़ा खेल…इस सब के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिहार की गद्दी किसके हाथ में जाएगी?बीजेपी खेमे से डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। संगठन में मजबूत पकड़ और आक्रामक राजनीति की पहचान उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।
वहीं, जेडीयू खेमे में भी हलचल कम नहीं है। निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठ रही है। पोस्टर राजनीति भी शुरू हो चुकी है, लेकिन असली फैसला तो सत्ता के शीर्ष पर ही होगा—जहां हर चाल बेहद सोच-समझकर चली जाती है। कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार ने इस पूरे राजनीतिक शतरंज की बिसात पहले ही बिछा दी है। अब बस इंतजार है उस अंतिम चाल का, जो 15 अप्रैल तक तस्वीर साफ कर सकती है। तो क्या बिहार में सत्ता परिवर्तन तय है?….क्या बीजेपी का मुख्यमंत्री बनेगा? और क्या सम्राट चौधरी बनेंगे बिहार के नए चेहरे?इन सभी सवालों के जवाब आने वाले कुछ दिनों में मिलेंगे… और तब तक सियासत का पारा यूँ ही चढ़ा रहेगा।







