
जहानाबाद सदर अस्पताल में व्यवस्था की बदहाली
जहानाबाद। सदर अस्पताल में नवजात बच्चों के इलाज के लिए आने वाले परिजनों की परेशानी बारिश और जलजमाव के कारण बढ़ गई है। अस्पताल की नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) के बाहर परिजन पानी के बीच रहने को मजबूर हैं। कई परिवार तिरपाल के सहारे दिन-रात गुजार रहे हैं। नवजात बच्चों के इलाज के दौरान अस्पताल परिसर में ही रहने की मजबूरी और बदहाल व्यवस्था ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं बताया जा रहा है कि गुरुवार को अस्पताल परिसर में जलजमाव की स्थिति के बीच SNCU के बाहर रहने वाले परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बारिश और आंधी के बीच तिरपाल के नीचे रह रहे परिवारों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक ठिकाने का अभाव बना हुआ है। कई परिजन पानी के बीच ही सोने, खाने और अपने जरूरी सामान रखने को मजबूर हैं।
नवजात बच्चों के इलाज के दौरान परिजनों की बढ़ी परेशानी
जहानाबाद सदर अस्पताल के SNCU में नवजात बच्चों का इलाज कराने के लिए जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा आसपास के दूसरे जिलों से भी लोग पहुंचते हैं। मसौढ़ी, पटना और अरवल के किंजर समेत दूर-दराज के इलाकों से आने वाले परिजनों को बच्चों के इलाज के दौरान अस्पताल परिसर में ही रहना पड़ता है। गंभीर हालत में भर्ती बच्चों को छोड़कर परिजन कहीं दूसरी जगह नहीं जा सकते ऐसे में अस्पताल परिसर में जलजमाव होने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है। बारिश के दौरान तिरपाल के नीचे रहना मुश्किल हो जाता है। पानी भरने के कारण सोने, बैठने और खाने की व्यवस्था प्रभावित होती है। परिजनों का कहना है कि बच्चों के इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में रहना जरूरी है, लेकिन यहां रहने के लिए पर्याप्त सुविधा नहीं मिल रही है।
तिरपाल के सहारे कट रही रात, सुरक्षित ठिकाने का अभाव
SNCU के बाहर कई परिवार तिरपाल लगाकर रह रहे हैं। बारिश के दौरान तिरपाल के नीचे पानी से बचने की कोशिश करते परिजनों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नवजात बच्चों के इलाज के लिए आए परिवारों में महिलाएं भी शामिल हैं, जिन्हें इस स्थिति में रहने में परेशानी हो रही है।
परिजनों का कहना है कि बच्चों की हालत गंभीर होने के कारण वे अस्पताल से दूर नहीं जा सकते। अगर रात में बच्चे की तबीयत बिगड़ती है, तो तुरंत SNCU पहुंचना जरूरी होता है। ऐसे में अस्पताल परिसर में ही रहने की मजबूरी बनी हुई है। लेकिन जलजमाव और बारिश के बीच रहने की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें काफी कठिनाइयां झेलनी पड़ रही हैं।
परिजनों ने बताई अपनी परेशानी
SNCU के बाहर रहने वाले परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था को लेकर अपनी परेशानी बताई। संजू देवी, सोनो कुमारी और गीता देवी समेत कई परिजनों ने कहा कि नवजात बच्चों के इलाज के दौरान उन्हें अस्पताल परिसर में ही रहना पड़ता है। बारिश के कारण पानी भर जाने से रहने में परेशानी हो रही है।
परिजनों के अनुसार, अस्पताल में भर्ती बच्चों के इलाज पर पूरा ध्यान देना पड़ता है। ऐसे में रहने और खाने की व्यवस्था के लिए बाहर जाना भी मुश्किल होता है। उनका कहना है कि अस्पताल प्रबंधन को नवजात बच्चों के परिजनों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक रहने की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि इलाज के दौरान उन्हें इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
सिविल सर्जन कार्यालय के पास ही जलजमाव
इस मामले में गौर करने वाली बात यह है कि जिस स्थान पर नवजात बच्चों के परिजन पानी के बीच रहने को मजबूर हैं, वहीं सिविल सर्जन कार्यालय भी स्थित है। अस्पताल परिसर में जलजमाव के बावजूद परिजनों की परेशानी बनी हुई है। इससे अस्पताल की व्यवस्था और जलनिकासी को लेकर सवाल उठ रहे हैं बारिश के बाद अस्पताल परिसर में पानी जमा होने की स्थिति सामने आने से यह भी स्पष्ट होता है कि मरीजों और उनके परिजनों के लिए मूलभूत सुविधाओं की जरूरत कितनी महत्वपूर्ण है। खासकर SNCU जैसी इकाई में भर्ती नवजात बच्चों के परिजनों के लिए सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध होना जरूरी है।
सिविल सर्जन ने जल्द सुधार का दिया भरोसा
अस्पताल की व्यवस्था को लेकर सिविल सर्जन डॉ. हरीश चंद्र चौधरी ने बताया कि अस्पताल की व्यवस्था में बहुत जल्द सुधार किया जाएगा। हालांकि, जलजमाव की समस्या का समाधान कब तक होगा और परिजनों के लिए रहने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी या नहीं, इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन नवजात बच्चों के परिजनों की परेशानी को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है। फिलहाल, SNCU के बाहर तिरपाल के सहारे रहने वाले परिवारों की मुश्किलें बारिश और जलजमाव के कारण बनी हुई हैं।






