मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में जहरीली शराब कांड के पांच दिन बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है, जबकि छह अंधेपन के शिकार लोगों के साथ करीब डेढ़ दर्जन लोगों का इलाज चल रहा है। फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि अवैध शराब के कारोबारियों द्वारा लोगों को मिथाइल अल्कोहल (मेथनॉल) युक्त जहरीली शराब परोसी गई, जिसके सेवन से यह हादसा हुआ। घटना में प्रयुक्त 1300 लीटर मिथाइल अल्कोहल बरामद किया गया है। इस हादसे में जयसिंहपुर पुलवाघाट के चंदू प्रसाद, परसौना के प्रमोद यादव और परिक्षण मांझी, बालगंगा के सम्पत साह, हरदिया के हरी भगत, लालकिशोर राय, विनोद साह, मुसहरी टोला के लड्डू साह तथा शंकरसरैया के मोहम्मद इलियास एवं योद्धा मांझी की मौत हो चुकी है। विनोद साह और योद्धा मांझी की मौत रविवार को हुई।
पुलिस और मद्यनिषेध विभाग ने संयुक्त कार्रवाई में बड़ी सफलता हासिल करते हुए 50 डब्बों में बंद करीब 1300 लीटर मिथाइल अल्कोहल बरामद किया है। प्रत्येक डब्बे में लगभग 26 लीटर रसायन भरा हुआ था। फॉरेंसिक जांच में यह पुष्टि हुई है कि बरामद रसायन और पीड़ितों द्वारा सेवन की गई शराब एक ही प्रकार की है। विशेषज्ञों के अनुसार, मेथनॉल एक अत्यंत विषैला रसायन है, जिसमें सायनाइट की तरह के गुण होते हैं। इसका उपयोग पेंट थिनर, एंटीफ्रीज और अन्य औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। यह रंगहीन होता है और इसकी गंध सामान्य शराब जैसी होती है, जिससे इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है। जानकारी के अनुसार महज 25 मिलीलीटर मेथनॉल का सेवन भी जानलेवा साबित हो सकता है। इसके प्रभाव से मतली, उल्टी, पेट दर्द, सांस लेने में कठिनाई, अंधापन और अंततः मृत्यु हो सकती है। सामान्य शराब से सस्ती होने की वजह से कई बार कारोबारी इसका लाभ लेने की कोशिश करते हैं और खास तौर से एशियाई देशों में इसका मादक पदार्थों के निर्माण में अवैध इस्तेमाल होता है। कुछ विकसित देशों में भी इसका इस्तेमाल पेय पदार्थों की मादकता को विस्तार देने के लिए भी किया जाता है।







