Home बिहार Begusarai ANM स्कूल का हाल बेहाल: वसूली, गंदा हॉस्टल और जली रोटियों...

Begusarai ANM स्कूल का हाल बेहाल: वसूली, गंदा हॉस्टल और जली रोटियों पर बवाल

108
0
Begusarai ANM School in a bad shape: Uproar over extortion, dirty hostel and burnt rotis

बेगूसराय: बिहार के बेगूसराय से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सिर्फ सिस्टम की नाकामी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग का भविष्य गढ़ रही बेटियों की सेहत और सपनों के साथ खिलवाड़ की कहानी बयां कर रही है। बता दें कि जहां एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए एएनएम जैसी ट्रेनिंग को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि प्रशिक्षण केंद्र ही “यातना केंद्र” में तब्दील होता दिख रहा है। अब इससे जुड़ा एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह मामला बेगूसराय के बलिया एएनएम ट्रेनिंग स्कूल का है, जहां खराब खाने के कारण छात्राओं का हर दिन किसी संघर्ष से कम नहीं बीत रहा है।

इस कारण एएनएम स्कूल इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि यहां रह रहीं करीब 60 प्रशिक्षु छात्राओं का जीवन बेहद कठिन हो गया है। छात्राओं का आरोप है कि उन्हें खाने में जली हुई रोटियां, बिना सब्जी के अधपकी दाल और बेहद खराब गुणवत्ता का भोजन दिया जा रहा है। हालात इतने खराब हैं कि अब तक 10 से अधिक छात्राएं फूड पॉइजनिंग और अन्य बीमारियों का भी शिकार हो चुकी हैं। इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। यह बात नाम गोपनीय रखने की शर्त पर एक छात्रा ने बताई है। आगे बताया कि सिर्फ खाना ही नहीं, हॉस्टल की स्थिति भी बदतर है। शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि वहां जाना भी मुश्किल हो गया है। साफ-सफाई का अभाव और बदबू छात्राओं की परेशानी को और बढ़ा रहे हैं। जब छात्राएं शिकायत करती हैं, तो उन्हें परीक्षा में फेल कर देने की भी धमकी दी जाती है।

GNSU Admission Open 2026

यही डर उन्हें खुलकर सामने आने से रोक रहा था। हालांकि अब वायरल वीडियो के जरिए पूरे मामले की सच्चाई उजागर हुई है। दरअसल, मेस व्यवस्था में भी बड़ा खेल सामने आया है। छात्राओं से हर महीने 3 हजार रुपये वसूले जाते हैं, लेकिन बदले में उन्हें बेहद घटिया खाना दिया जा रहा है। छात्राओं ने बताया कि इसके अलावा, एक साल से स्कॉलरशिप की राशि भी नहीं मिली है, जबकि सभी दस्तावेज महीनों पहले जमा किए जा चुके हैं। प्रशासन कभी प्रभारी बदलने तो कभी अन्य बहाने बनाकर मामले को टाल रहा है। जब इस पूरे मामले की जानकारी सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार तक पहुंची, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए प्राचार्य विकास राज चतुर्वेदी से जवाब-तलब किया है। प्राचार्य ने शौचालय की खराब स्थिति को स्वीकार किया, लेकिन मेस और छात्राओं की बीमारी को लेकर गोलमोल जवाब देकर कन्नी काट गए।