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बिहार के छात्रों से भेदभाव का आरोप: पॉलिटेक्निक कॉलेज में प्रिंसिपल के खिलाफ हंगामा

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Allegations of discrimination against students from Bihar: Uproar erupts at Polytechnic College against Principal

पटना: राजधानी पटना के बाढ़ अनुमंडल के राणाबीघा गांव के पास स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में परीक्षा फॉर्म नहीं भराए जाने को लेकर गुरुवार से ही कॉलेज गेट पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। 11 मई से परीक्षा शुरू होनी है, लेकिन छात्रों का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। शुक्रवार रात लगभग नौ बजे बाढ़ थाना पुलिस ने छात्रों को एफआईआर कर जीवन बर्बाद होने की धमकी देकर कॉलेज परिसर के पास से हटाया। इसके बाद छात्र और उनके परिजन रात में ही एसडीओ गरिमा लोहिया से मिलने पहुंचे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी और सभी को वापस लौटना पड़ा।

छात्रों का आरोप है कि कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. के.एल. पुष्कर छात्रों के साथ जातिवाद और क्षेत्रवाद करते हैं तथा जानबूझकर खास वर्ग के छात्रों को परेशान कर रहे हैं। आरोप है कि छात्रों को कई बार “बिहारी” कहकर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। बताया जा रहा है कि लगभग 70 से 80 फाइनल ईयर के छात्रों का परीक्षा फॉर्म नहीं भरा जा सका है। जानकारी के अनुसार बीती रात पोर्टल खुला भी, लेकिन केवल चयनित छात्रों का ही फॉर्म भरा गया। कॉलेज सूत्रों के अनुसार दो दिन पहले परीक्षा देने से रोके जाने पर एक छात्र ने कॉलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए सुसाइड नोट लिखकर आत्महत्या की कोशिश की। समय रहते हॉस्टल में रह रहे अन्य छात्रों ने उसकी जान बचा ली। बताया जा रहा है कि सुसाइड नोट नीतीश कुमार नामक छात्र का है। सुसाइड नोट में छात्र ने लिखा है कि उसका आज तक एक भी कैरी पेपर नहीं है और वह नियमित रूप से क्लास करता है।

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उसने लिखा कि कॉलेज के रोहन सर अच्छी पढ़ाई कराते हैं, जबकि बाकी शिक्षक क्लास में पढ़ाई नहीं करते थे। छात्र ने आरोप लगाया कि 84 प्रतिशत अटेंडेंस होने के बावजूद उसे डिबार कर दिया गया। नोट में यह भी लिखा गया कि कॉलेज में लैब की सुविधा नहीं है। छात्र ने लिखा कि वह कॉलेज की स्थिति के बारे में अपने परिवार को नहीं बता सकता, इसलिए यह कदम उठा रहा है। उसने इस स्थिति के लिए प्रिंसिपल और एक शिक्षक को जिम्मेदार ठहराया है। एक छात्र के परिजन दीपक पांडे ने कहा कि यदि कोई छात्र आत्महत्या करता है तो इसके जिम्मेदार कॉलेज प्रशासन होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन छात्रों और उनके अभिभावकों से बातचीत करने से बच रहा है। परिजनों का कहना है कि प्रिंसिपल बिहारी छात्रों को “चोर” कहते हैं और उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करते हैं।