चंडीगढ़: पंजाब के पूर्व विशेष मुख्य सचिव के.बी.एस. सिद्धू ने राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति एवं रणनीति सम्मेलन ‘प्रहार’ का स्वागत करते हुए पंजाब की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए सात महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय रणनीति की सफलता के लिए विशेष रूप से रावी नदी से लगती भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण सीमा पर जमीनी स्तर के उपाय जरूरी हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मंगलवार को लिखे पत्र में सिद्धू ने सीमा प्रबंधन, ड्रोन और नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास से जुड़े सुझाव दिए। पत्र की प्रतियां पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया और मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी भेजी गई हैं।
सिद्धू ने कहा कि रावी नदी मानसून के दौरान अपना मार्ग बदलती रहती है, जिससे पारंपरिक सीमा बाड़ लगाना व्यावहारिक नहीं रह जाता। उन्होंने असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर तैनात व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (सीआईबीएमएस) के सेंसर और रडार नेटवर्क को रावी तथा सतलुज के नदीय क्षेत्रों में लागू करने का सुझाव दिया।
उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और राज्य सिंचाई विभाग से ऐसी बाड़ विकसित करने की अपील की, जो 2025 जैसी भीषण बाढ़ का सामना कर सके। उस दौरान कई सीमा चौकियां जलमग्न हो गई थीं।
ड्रोन और नशीले पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए सिद्धू ने बरामदगी के आंकड़ों के आधार पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से ड्रोन के संभावित ड्रॉप जोन का पूर्वानुमान लगाने की सिफारिश की। उन्होंने सीमावर्ती जिलों में मादक पदार्थों और आतंकवाद से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए विशेष अदालतों तथा फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की स्थापना पर भी जोर दिया।
सिद्धू ने सीमावर्ती युवाओं के लिए नशामुक्ति, पुनर्वास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई। उन्होंने गुरदासपुर के मकौड़ा पत्तन पर स्थायी पुल बनाने, सीमा पार खेती करने वाले किसानों को उचित मुआवजा देने और बाड़ के गेट खोलने का समय उनके अनुकूल रखने का सुझाव दिया।
इसके अलावा, सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों, डॉक्टरों और राजस्व कर्मचारियों को कठिन क्षेत्र भत्ता देने की मांग की।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के मुद्दे को उठाने के लिए उन्होंने सीमा पर मार गिराए गए प्रत्येक ड्रोन का दस्तावेजीकरण करने और करतारपुर कॉरिडोर को मानवीय दृष्टिकोण से खुला रखने की वकालत की।
सिद्धू ने कहा कि सीमा सुरक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को साझेदार के रूप में काम करना होगा।







