मानसा : पंजाब में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में चल रहा 22 दिनों से जारी आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। पंजाब सरकार और झोटा के परिवार के बीच हुए समझौते के तहत उनकी पत्नी को दो करोड़ रुपये का मुआवजा और सरकारी नौकरी देने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का भी आश्वासन दिया है। समझौते के बाद झोटा के परिवार ने उनके पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार के लिए सहमति दे दी है।
मानसा में सरकार और संयुक्त कार्रवाई समिति (जॉइंट एक्शन कमिटी) के सदस्यों के बीच करीब पांच घंटे तक चली बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। बैठक में पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान और कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां ने सरकार का प्रतिनिधित्व किया। वहीं, झोटा के परिवार के सदस्य और आंदोलनकारी समिति के प्रतिनिधि भी बातचीत में शामिल हुए।
समझौते के तहत सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने पर सहमत हुई है। इससे जेल में बंद सामाजिक कार्यकर्ता लक्खा सिधाना और अन्य प्रदर्शनकारियों की रिहाई का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। दरअसल, इन मामलों की वापसी और जेल में बंद नेताओं की रिहाई का मुद्दा बातचीत के दौरान प्रमुख अड़चन बना हुआ था।
इस समझौते में भम्मे कलां के दलजीत सिंह के परिवार को भी राहत दी गई है। सरकार ने उनके परिवार के एक सदस्य को 50 लाख रुपये का मुआवजा और सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया है। दलजीत सिंह की मौत के बाद उनके परिवार की ओर से भी न्याय और आर्थिक सहायता की मांग की जा रही थी।
गौरतलब है कि 13 अक्टूबर को परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद से उनका शव मानसा के सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा हुआ था। परिवार और आंदोलनकारी उनकी मांगें पूरी होने तक पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं थे। इस घटना के विरोध में लगातार प्रदर्शन किया जा रहा था।
समझौते के बाद संयुक्त कार्रवाई समिति ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास का घेराव करने की प्रस्तावित योजना भी स्थगित कर दी है। सरकार के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त होने से पंजाब में पिछले कई दिनों से जारी तनाव कम होने की उम्मीद है।







