चंडीगढ़: पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठनात्मक गतिविधियां तेज करने की योजना बनाई है। इसी कड़ी में पार्टी संगरूर में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक आयोजित करेगी। बैठक में राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति, संगठन को मजबूत बनाने और आगामी राजनीतिक रोडमैप पर चर्चा की जाएगी।
प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह भी शामिल होंगे। भाजपा के प्रदेश महासचिव अनिल सरीन के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य पंजाब की मौजूदा राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों की समीक्षा करना तथा आगामी चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों को दिशा देना है।
117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति
बैठक में पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर पार्टी की स्थिति और संगठनात्मक तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने और पार्टी की गतिविधियों को प्रभावी बनाने के उपायों पर विचार होगा। नेताओं के बीच आगामी चुनाव को लेकर रणनीतिक चर्चा भी की जाएगी।
अनिल सरीन ने बताया कि बैठक में राज्य से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। किसानों की समस्याएं, नशे का बढ़ता प्रकोप, सरकारी कर्मचारियों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए), कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और पंजाब की आर्थिक स्थिति चर्चा के प्रमुख विषय होंगे। इन मुद्दों पर पार्टी की ओर से प्रस्ताव पारित किए जाने की भी संभावना है।
वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में होगी चर्चा
बैठक में भाजपा के पंजाब प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया, सह-प्रभारी वरिंदर सचदेवा, सह-प्रभारी एवं सांसद डॉ. अलका गुर्जर तथा वरिष्ठ नेता तरुण चुघ भी विभिन्न सत्रों को संबोधित कर सकते हैं। इन नेताओं की मौजूदगी में संगठन की मौजूदा स्थिति, राजनीतिक चुनौतियों और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
पार्टी नेतृत्व का जोर राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने पर रहेगा। इसके अलावा पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भविष्य की रणनीति तैयार करने पर भी विचार किया जाएगा।
बैठक को आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा की संगठनात्मक तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें होने वाले विचार-विमर्श और पारित प्रस्तावों के आधार पर पार्टी राज्य में अपनी आगे की राजनीतिक गतिविधियों की दिशा तय करेगी।







