उत्तराखंड में जमीन विवाद पर सियासत तेज, कांग्रेस का ‘भूमि बचाओ’ अभियान
Politics heats up over land disputes in Uttarakhand; Congress launches ‘Save Land’ campaign

देहरादून : उत्तराखंड में सरकारी जमीनों के उपयोग को लेकर कांग्रेस और भाजपा सरकार के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर राज्य की बेशकीमती सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाते हुए राज्यव्यापी ‘भूमि बचाओ, धामी हटाओ’ अभियान शुरू किया है। वहीं, राज्य सरकार ने इन आरोपों को भ्रामक बताते हुए स्पष्ट किया है कि आर्थिक विकास के उद्देश्य से सरकारी जमीन के केवल कुछ चुनिंदा भूखंडों को चिह्नित किया गया है।

कांग्रेस महासचिव एवं उत्तराखंड की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य की कीमती सरकारी जमीन और ब्रिटिशकालीन ऐतिहासिक इमारतों को नीलामी की प्रक्रिया में शामिल करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जिम्मेदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से राज्य की महत्वपूर्ण संपत्तियों के निजीकरण का रास्ता तैयार किया जा रहा है। कांग्रेस ने मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट की जमीन से जुड़े फैसले सहित अन्य मामलों पर भी सरकार से पुनर्विचार करने की मांग की है। इस मुद्दे को लेकर पार्टी नेताओं ने विभिन्न शहरों में विरोध मार्च निकाले।

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दूसरी ओर, राज्य सरकार ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (UIIDB) के माध्यम से परिसंपत्ति मुद्रीकरण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। प्रमुख सचिव (नियोजन) आर. मीनाक्षी सुंदरम के अनुसार, राज्य की उपलब्ध सरकारी जमीन का योजनाबद्ध उपयोग कर निवेश, रोजगार और राजस्व बढ़ाने का लक्ष्य है। इसके लिए सीमित संख्या में ही सरकारी भूखंड चिह्नित किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि अगले दो से तीन महीनों में लगभग छह से सात चयनित भूखंडों के लिए बोली प्रक्रिया शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार को उम्मीद है कि पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में निवेश से 7,000 से 8,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जबकि 10,000 से 15,000 लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, जीएसटी और अन्य माध्यमों से राज्य को प्रतिमाह लगभग 300 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है।

प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि चौबटिया और धनोल्टी की जमीन को प्रस्ताव से बाहर कर दिया गया है। वहीं, एचएमटी और ऋषिकेश की आईडीपीएल भूमि का भी मौजूदा प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। सरकार का कहना है कि यह पहल जमीन बेचने के बजाय निवेश और आर्थिक विकास को गति देने की रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, इस मुद्दे पर कांग्रेस और सरकार के बीच राजनीतिक बहस जारी है।