Home राष्ट्रीय गोमती किनारे निर्माण पर NGT की रोक, 2,500 करोड़ की परियोजनाओं पर...

गोमती किनारे निर्माण पर NGT की रोक, 2,500 करोड़ की परियोजनाओं पर छाया संकट

31
0
NGT bans construction on Gomti river banks, projects worth Rs 2,500 crore in jeopardy

लखनऊ: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गोमती नदी के किनारे और बाढ़ क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों पर अंतरिम रोक लगाते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण (लविप्रा) समेत संबंधित विभागों से चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। ट्रिब्यूनल के इस आदेश से करीब 2,500 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं के प्रभावित होने की आशंका है।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने नौ जुलाई को पर्यावरण कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता आलोक सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को निर्धारित की गई है।


याचिका में आरोप लगाया गया है कि गोमती नदी के दोनों किनारों पर तटबंधों का चौड़ीकरण, फोर-लेन सड़क निर्माण और बहुमंजिला इमारतों के निर्माण का कार्य पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करते हुए किया जा रहा है। इसमें पिपराघाट पुल से शहीद पथ तथा शहीद पथ से किसान पथ तक चल रही परियोजनाओं का उल्लेख किया गया है। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा कि गंगा नदी (संरक्षण, संरक्षण एवं प्रबंधन) प्राधिकरण आदेश, 2016 के प्रावधान केवल गंगा की मुख्य धारा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उसकी सहायक नदियों पर भी लागू होते हैं। चूंकि गोमती गंगा नदी तंत्र का हिस्सा है, इसलिए उसके सक्रिय बाढ़ क्षेत्र, नदी तल और तटीय क्षेत्र में किसी भी प्रकार के स्थायी अथवा अस्थायी निर्माण पर निर्धारित नियम लागू होंगे।

GNSU Admission Open 2026


याचिकाकर्ता का दावा है कि जहां पर्यावरणीय मानकों के अनुसार नदी से 400 मीटर के दायरे में निर्माण पर प्रतिबंध है, वहीं कई स्थानों पर निर्माण कार्य नदी किनारे से मात्र छह से 20 मीटर की दूरी पर किए जा रहे हैं। इस आदेश से ग्रीन कॉरिडोर के तीसरे और चौथे चरण के तहत प्रस्तावित तटबंध एवं फोर-लेन सड़क परियोजनाओं के अलावा गोमती नगर एक्सटेंशन क्षेत्र में नदी की ओर विकसित की जा रही बहुमंजिला इमारतों पर भी असर पड़ सकता है।


एनजीटी ने संबंधित एजेंसियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक वैधानिक एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त की गई थीं या नहीं तथा क्या इन परियोजनाओं के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की पूर्व अनुमति ली गई थी। ट्रिब्यूनल ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि इस प्रकार के निर्माण से पहले से प्रदूषण का सामना कर रही गोमती नदी को स्थायी क्षति पहुंच सकती है।