नयी दिल्ली। देश की प्रमुख कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने मानेसर स्थित अपने विनिर्माण परिसर में 300 किलोवाट क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर संयंत्र शुरू किया है। कंपनी के अनुसार, यह एक पायलट परियोजना है और इसके अनुभव के आधार पर भविष्य में अन्य विनिर्माण संयंत्रों में भी इस तकनीक का विस्तार किया जा सकता है।
कंपनी ने बताया कि संयंत्र में तैयार होने वाली ग्रीन हाइड्रोजन को प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर विनिर्माण प्रक्रिया में प्रोसेस फ्यूल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य उत्पादन प्रक्रिया में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाना और कार्बन उत्सर्जन कम करना है।
मारुति सुजुकी के मुताबिक, संयंत्र से परिसर में उत्पन्न होने वाली सौर ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल भी संभव होगा। विशेष रूप से छुट्टियों के दौरान अतिरिक्त सौर ऊर्जा का उपयोग ग्रीन हाइड्रोजन तैयार करने में किया जाएगा। तैयार हाइड्रोजन को संग्रहित कर बाद में विनिर्माण कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने कहा कि कंपनी विनिर्माण प्रक्रिया में विभिन्न हरित ऊर्जा समाधानों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि 300 किलोवाट का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र केंद्र सरकार के ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है।
कंपनी के अनुसार, वह हरियाणा और गुजरात स्थित अपने विनिर्माण संयंत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाने की योजना बना रही है।
मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2030-31 तक अपने कार्बन फुटप्रिंट को घटाकर 2,66,000 टन करने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में कंपनी का कार्बन फुटप्रिंट करीब 6,15,000 टन है।
इसके अलावा कंपनी खरखौदा संयंत्र में प्रतिदिन 10 टन क्षमता वाला बायोगैस संयंत्र स्थापित कर रही है, जिसके अगले वर्ष मार्च तक चालू होने की उम्मीद है। खरखौदा में कंपनी ने हाल ही में एक मेगावाट आवर क्षमता वाला बैटरी ऊर्जा भंडारण तंत्र भी शुरू किया है।







