गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच देवभोग वन परिक्षेत्र के इंदा गांव के जंगल में भूस्खलन की घटना सामने आई है। पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा खिसकने से करीब आठ से 10 एकड़ वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। घटना के बाद इलाके में दोबारा भूस्खलन की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भूस्खलन की घटना वन कक्ष क्रमांक 1293 में हुई। प्रभावित क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिट्टी और पत्थरों का जमाव देखा गया है। कई स्थानों पर पेड़ों की जड़ें जमीन से बाहर निकल आई हैं, जबकि विशाल चट्टानें अपने मूल स्थान से खिसककर पहाड़ी के निचले हिस्से में पहुंच गई हैं।
भूस्खलन के कारण पहाड़ी के एक हिस्से का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। लगातार बारिश के बीच हुई इस घटना ने क्षेत्र की स्थिरता और आसपास के जंगल की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
स्थानीय स्तर पर पहाड़ी की ढलान पर भारी चट्टानों के जमा होने और कुछ स्थानों पर जमीन में दरारें दिखाई देने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्र का तकनीकी निरीक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, दोबारा भूस्खलन की आशंका कितनी गंभीर है, इसका आकलन विस्तृत जांच के बाद ही किया जा सकेगा।
इस बीच, वन क्षेत्र में अतिक्रमण और खेती किए जाने संबंधी स्थानीय शिकायतों की भी चर्चा है। हालांकि, फिलहाल इन गतिविधियों और भूस्खलन के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए बारिश की तीव्रता, मिट्टी की प्रकृति, पहाड़ी की भूगर्भीय संरचना और वन क्षेत्र की मौजूदा स्थिति सहित विभिन्न पहलुओं का अध्ययन आवश्यक होगा।
प्रभावित पहाड़ी और आसपास के इलाके की सुरक्षा को लेकर अब वन विभाग की जांच पर निगाहें टिकी हैं। क्षेत्र में जमीन की दरारों, खिसकी चट्टानों और पहाड़ी की ढलान की स्थिति का तकनीकी आकलन किए जाने की आवश्यकता है।
जंगल के निचले हिस्से में रहने वाले लोगों और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील स्थानों पर आवाजाही को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत भी बताई जा रही है।







