Karnataka faces political turmoil over rainfall shortage, with opposition demanding an early drought declaration.

बेंगलुरु: कर्नाटक में मॉनसून के दौरान कम बारिश से पैदा हुआ संकट अब राजनीतिक मुद्दे में बदलता जा रहा है। राज्य में कई इलाकों में फसल प्रभावित होने और पानी की कमी की शिकायतों के बीच विपक्ष ने सरकार पर कार्रवाई में देरी का आरोप लगाते हुए जल्द से जल्द सूखा घोषित करने की मांग तेज कर दी है।

विपक्ष का कहना है कि बारिश की कमी से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में प्रभावित तालुकों को औपचारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों के लिए राहत और मुआवजे की व्यवस्था की जानी चाहिए। विपक्ष ने सरकार के उस रुख पर भी सवाल उठाया है, जिसमें औपचारिक घोषणा से पहले फसल नुकसान के आकलन की प्रक्रिया जारी रखने की बात कही जा रही है।

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सरकार की ओर से कहा गया है कि राजस्व और कृषि विभाग संयुक्त रूप से फसल नुकसान का आकलन कर रहे हैं। अधिकारियों की रिपोर्ट और जमीनी स्थिति के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। सरकार यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि सूखा घोषित करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और एनडीआरएफ के मानकों के अनुरूप होगी।

इस बीच विधानसभा का मॉनसून सत्र 27 अगस्त को समाप्त होने वाला है। ऐसे में विपक्ष को आशंका है कि यदि प्रभावित क्षेत्रों की अंतिम सूची और राहत संबंधी फैसला सत्र के दौरान नहीं हुआ, तो किसानों की समस्याओं पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाएगी।

बारिश की कमी के साथ कर्नाटक में पानी का मुद्दा भी गंभीर होता जा रहा है। कावेरी जल विवाद के बीच सरकार पर एक ओर राज्य के किसानों और आम लोगों की पानी की जरूरतें पूरी करने तथा दूसरी ओर अंतरराज्यीय जल बंटवारे से जुड़ी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने का दबाव है।

फिलहाल कर्नाटक में राजनीतिक बहस का केंद्र कम बारिश से ज्यादा इस बात पर है कि सरकार संकट को आधिकारिक रूप से कब स्वीकार करती है और प्रभावित किसानों तक राहत कितनी जल्दी पहुंचती है।