नयी दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के विमानन क्षेत्र पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट फ्यूल की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया है, जिसने एयरलाइंस की लागत और यात्रियों की जेब दोनों पर भारी दबाव डाल दिया है। ताज़ा संशोधन के बाद दिल्ली में ATF की कीमत 2.07 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। यह बढ़ोतरी एक महीने के भीतर दूसरी बार हुई है, जिससे विमानन उद्योग की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी एयरलाइन की कुल परिचालन लागत में फ्यूल का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत होता है। ऐसे में ATF की कीमतों में यह तेज़ उछाल सीधे तौर पर टिकट दरों को प्रभावित करेगा। पहले से ही पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में एयरस्पेस बंद होने के कारण एयरलाइंस को लंबा रूट लेना पड़ रहा है, जिससे फ्यूल खपत बढ़ गई है और ऑपरेशन महंगा हो गया है।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के चलते तेल सप्लाई चेन पर भी बड़ा असर पड़ा है। प्रमुख तेल उत्पादक देशों में उत्पादन में कमी और निर्यात मार्गों पर बढ़ते जोखिम ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है, वहां अस्थिरता ने अंतरराष्ट्रीय बाजार को झकझोर दिया है।
इसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ रहा है। एयरलाइंस अब बढ़ती लागत की भरपाई के लिए फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने या टिकट कीमतों में संशोधन करने पर विचार कर रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में हवाई यात्रा आम लोगों के लिए और महंगी हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो एविएशन सेक्टर पर इसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है।







