
सासाराम (रोहतास)। केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे चार नए श्रम कानूनों के खिलाफ देशव्यापी विरोध का असर बुधवार को सासाराम में भी व्यापक रूप से देखने को मिला। विभिन्न श्रमिक संगठनों और मजदूर यूनियनों ने जिला मुख्यालय में एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों और बाहों पर काली पट्टी बांधकर सरकार की नीतियों के प्रति अपना कड़ा आक्रोश दर्ज कराया।प्रदर्शन कर रहे नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ये चार नए श्रम कानून पूरी तरह से मजदूर विरोधी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों के जरिए मजदूरों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने की साजिश रची जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जहां पहले ड्यूटी का समय 8 घंटे निर्धारित था, उसे अब बढ़ाकर सीधे 12 घंटे कर दिया गया है। यह मजदूरों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
नए प्रावधानों के तहत अब महिलाओं को भी नाइट ड्यूटी में लगाया जा सकेगा। संगठनों का तर्क है कि इससे महिलाओं की सुरक्षा और उनके सामाजिक परिवेश पर बुरा असर पड़ेगा आंदोलनकारियों ने बताया कि इन कानूनों से मजदूरों के संघर्ष से हासिल किए गए पुराने अधिकार छीन लिए जाएंगे और कंपनियों को मनमानी करने की छूट मिलेगी।
सासाराम के कार्यालयों पर प्रदर्शन करते हुए मजदूरों ने कहा कि सरकार की यह दमनकारी नीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदर्शनकारियों का कहना था, “सरकार अपनी जिद मजदूरों पर थोप रही है। जो कानून मजदूरों के हित में नहीं, उन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।” इस विरोध प्रदर्शन के कारण शहर के कई हिस्सों में आवाजाही पर भी असर पड़ा। श्रमिक नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इन काले कानूनों को वापस नहीं लेती है, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा






