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Supreme Court of India में ‘तलाक-ए-हसन’ पर आज अहम सुनवाई, एकतरफा तलाक पर फैसला नजरें

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Important hearing on 'Talaq-e-Hasan' in the Supreme Court of India today, eyes on the decision on unilateral divorce

नयी दिल्ली: देश की सबसे बड़ी अदालत में आज एक ऐसे मामले की सुनवाई होने जा रही है, जिसका सीधा असर मुस्लिम महिलाओं पर पड़ेगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को एक साथ कई याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तैयार है. इन याचिकाओं में  ‘तलाक-ए-हसन’ और ‘तलाक-ए-अहसन’ जैसी एकतरफा तलाक की प्रथाओं को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की विशेष पीठ इस मामले को सुनेगी।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये प्रथाएं पूरी तरह से एकतरफा हैं, जहां एक खास धर्म के पुरुष बिना पत्नी की सहमति के शादी को खत्म कर सकता है। याचिकाकर्ताओं ने सवाल पूछा है कि आधुनिक भारत में ऐसी प्रक्रियाएं संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (भेदभाव का निषेध) और 21 (गरिमा के साथ जीने का अधिकार) का उल्लंघन नहीं करतीं? इस मामले को लेकर पहले भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने बेहद संतुलित रुख अपनाया था. पहले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ‘तलाक-ए-हसन’ पर रोक लगाते हुए कहा, “जब तक पति कोर्ट में पेश होकर यह साबित नहीं करता कि तलाक कानूनन सही है, तब तक दोनों को शादीशुदा ही माना जाएगा।”

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चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने यह स्पष्ट किया है कि अदालत धार्मिक मामलों में कम से कम हस्तक्षेप करना चाहती है, लेकिन जहां बात मौलिक अधिकारों या मानवाधिकारों के हनन की आएगी, वहां कोर्ट चुप नहीं बैठेगा। मुख्य याचिका पत्रकार बेनजीर हिना ने दायर की थी। इस याचिका को लेकर कोर्ट ने आपसी सुलह की गुंजाइश भी तलाशी है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस कुरियन जोसेफ को मध्यस्थ नियुक्त किया गया है। कोर्ट का मानना है कि अगर बातचीत से कोई सम्मानजनक समाधान निकल सके, तो वह सबसे बेहतर होगा। सुप्रीम कोर्ट में एक और बड़े मुद्दे पर सुनवाई होने वाली है, वो है ‘डिजिटल तलाक’। आजकल ईमेल, व्हाट्सएप या मैसेज के जरिए दिए जा रहे तलाक की वैधता पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए सख्त गाइडलाइंस बनाई जाएं, जिससे तकनीक का इस्तेमाल किसी के शोषण के लिए न हो सके।