अगरतला: त्रिपुरा में मूल निवासियों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए हुए त्रिपक्षीय समझौते को लागू करने की प्रक्रिया अब तेज होने की उम्मीद है। केंद्रीय गृह मंत्रालय का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अगले सप्ताह त्रिपुरा का दौरा करेगा। इस दौरान 2024 में केंद्र सरकार, त्रिपुरा सरकार और भाजपा की सहयोगी टिपरा मोथा के बीच हुए समझौते के लंबित प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
अमित शाह की बैठक के बाद बढ़ी सक्रियता
चार सितंबर को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में समझौते को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा और टिपरा मोथा के प्रमुख प्रद्योत किशोर देबबर्मन भी मौजूद थे।
करीब दो वर्ष से लंबित इस समझौते को अब आगे बढ़ाने के लिए दो महीने के भीतर कार्यान्वयन प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया है। गृह मंत्रालय के प्रस्तावित प्रतिनिधिमंडल का दौरा इसी प्रक्रिया को गति देने की कड़ी माना जा रहा है।
एडीसी को भूमि अधिकार समेत कई मुद्दों पर चर्चा
प्रद्योत किशोर देबबर्मन के अनुसार, अमित शाह ने समझौते के मूल मुद्दों के समाधान का आश्वासन दिया है। इनमें त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (एडीसी) के प्रशासन को भूमि संबंधी अधिकार देने का मुद्दा भी शामिल है।
प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान राज्य सरकार, टिपरा मोथा और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठकें होने की संभावना है। इन बैठकों में समझौते के तहत लंबित विषयों की पहचान, अब तक हुई प्रगति और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी।
राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े हैं मुद्दे
चार सितंबर 2024 को हुए त्रिपक्षीय समझौते का उद्देश्य त्रिपुरा के मूल निवासियों से जुड़े राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक मुद्दों का समाधान करना था। समझौते के कई प्रावधानों के क्रियान्वयन में देरी को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है।
अब केंद्र की पहल के बाद संबंधित पक्षों के बीच बातचीत के जरिए लंबित मामलों को सुलझाने और समझौते के वादों को जमीन पर लागू करने की कोशिश तेज होने की उम्मीद है।
एडीसी चुनाव से पहले बढ़ी अहमियत
त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद के तहत ग्राम परिषद के चुनाव 28 सितंबर को प्रस्तावित हैं। इन चुनावों में भाजपा, टिपरा मोथा और इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, जबकि उनका मुकाबला माकपा और कांग्रेस से होगा।
ऐसे में गृह मंत्रालय के प्रतिनिधिमंडल का दौरा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्र की ओर से समझौते को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने से संबंधित पक्षों के बीच संवाद और लंबित मुद्दों के समाधान की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।







