GHADC कार्यकाल बढ़ाने के फैसले का GSMC ने किया विरोध
GSMC opposes the decision to extend the GHADC's term.

तुरा: मेघालय के सामाजिक-राजनीतिक संगठन गारोलैंड राज्य आंदोलन समिति (GSMC) ने गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद (GHADC) का कार्यकाल दूसरी बार छह महीने बढ़ाए जाने के राज्य सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई है। संगठन ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और स्वायत्त जिला परिषद की संवैधानिक भावना के विपरीत बताया है।

GSMC के सह-अध्यक्ष जुनेस्त्रेमी आर. मराक ने कहा कि GHADC के कार्यकाल को बार-बार बढ़ाया जाना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की ओर से परिषद की चुनाव प्रक्रिया में अनुचित हस्तक्षेप किया जा रहा है। उनका कहना है कि GHADC की संवैधानिक स्थिति और स्वायत्त स्वरूप का सम्मान किया जाना चाहिए तथा निर्वाचित परिषद के कार्यकाल में लगातार विस्तार से उसके लोकतांत्रिक कामकाज पर असर पड़ सकता है।

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मराक ने कहा कि परिषद के चुनाव समय पर कराना जरूरी है, ताकि क्षेत्र के लोगों को अपनी लोकतांत्रिक भागीदारी का अवसर मिल सके। उन्होंने राज्य सरकार से चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की अतिरिक्त देरी या हस्तक्षेप से बचने की अपील की। संगठन ने कहा कि चुनाव की तैयारियां चल रही हैं, ऐसे में कार्यकाल बढ़ाने के फैसले को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

राज्य मंत्रिमंडल ने GHADC का कार्यकाल छह महीने बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। सरकार की ओर से बताया गया है कि परिषद के चुनाव कराने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम अभी जारी है। इसी वजह से चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक परिषद के कार्यकाल में विस्तार किया गया है।

GHADC के पिछले छह महीने के विस्तार की अवधि समाप्त होने वाली है। इससे पहले गारो हिल्स क्षेत्र में मतदान से पहले हुई सामुदायिक हिंसा के बाद निर्धारित चुनाव को स्थगित करना पड़ा था। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां जारी रहीं।

GSMC ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए चुनाव समय पर कराए जाना आवश्यक है। संगठन ने राज्य सरकार से परिसीमन और मतदाता सूची संबंधी प्रक्रियाओं को जल्द पूरा कर GHADC के चुनाव कराने की दिशा में कदम उठाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि परिषद के कार्यकाल में बार-बार विस्तार के बजाय जनता को निर्वाचित प्रतिनिधि चुनने का अवसर दिया जाना चाहिए।