Devotees are angry at not being allowed entry to the Dandavat Yatra in Bhangarh, demanding the opening of the main gate.

अलवर: राजस्थान के अलवर जिले में करीब 18 वर्षों से चली आ रही पारंपरिक दण्डवत पदयात्रा को भानगढ़ में प्रवेश नहीं दिए जाने को लेकर श्रद्धालुओं में नाराजगी फैल गई। शनिवार को भानगढ़ पहुंची पदयात्रा के श्रद्धालुओं ने मुख्य प्रवेश द्वार नहीं खोले जाने के विरोध में प्रदर्शन किया और पुरातत्व विभाग के खिलाफ नारेबाजी की।

जानकारी के अनुसार, गोलाकाबास से हर वर्ष आयोजित होने वाली दण्डवत पदयात्रा इस बार भी परंपरा के अनुसार भानगढ़ के लिए रवाना हुई। करीब 18वीं दण्डवत यात्रा सुबह भानगढ़ मोड़ से शुरू हुई और लगभग पांच घंटे बाद मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंची।

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श्रद्धालुओं का कहना है कि यात्रा के दौरान हनुमान मंदिर से भोमिया जी मंदिर तक जाने के लिए भानगढ़ का मुख्य द्वार खोला जाता रहा है। लेकिन इस बार पुरातत्व विभाग के अधिकारियों की ओर से प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। इससे यात्रा में शामिल करीब एक हजार श्रद्धालुओं में आक्रोश फैल गया।

मुख्य द्वार बंद रहने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौके पर ही एकत्र हो गए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुरातत्व विभाग के खिलाफ नारे लगाए और परंपरागत यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए प्रवेश द्वार खोलने की मांग की।

ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले करीब 18 वर्षों से गोलाकाबास से भानगढ़ तक यह दण्डवत यात्रा आयोजित होती आ रही है। उनका कहना है कि हर वर्ष श्रद्धालु इसी परंपरा के तहत भानगढ़ पहुंचते हैं। इस बार प्रवेश नहीं मिलने से धार्मिक भावना आहत हुई है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक मुख्य द्वार नहीं खोला जाता, तब तक उनका विरोध और धरना जारी रहेगा। मामले की जानकारी टहला थाना पुलिस को भी दी गई है।

फिलहाल श्रद्धालुओं का प्रदर्शन जारी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, विरोध के दौरान पुरातत्व विभाग और प्रशासन के अधिकारियों के मौके पर नहीं पहुंचने से नाराजगी और बढ़ गई। अब श्रद्धालुओं और प्रशासन के बीच बातचीत के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।