बैतूल: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) अधिनियम के तहत दर्ज हत्या के प्रयास के एक मामले में विशेष न्यायालय ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने प्रत्येक दोषी पर दो-दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम के विशेष न्यायाधीश रईस खान ने थाना साईंखेड़ा क्षेत्र के ग्राम गौला निवासी मुकेश गावंडे, अजय गावंडे, अंतिम गावंडे तथा राजकुमार मालवीय को भारतीय दंड संहिता की धारा 307/34 और एससी-एसटी अधिनियम की धारा 3(2)(5) के तहत दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई।
विशेष लोक अभियोजक शशिकांत नागले ने बताया कि घटना दो अप्रैल 2022 की रात की है। फरियादी संजय झारखंडे अपनी पत्नी मंजू और बच्चे के साथ पूजा के लिए जा रहा था। रास्ते में गांव के चौक पर पुराने विवाद को लेकर आरोपियों ने कथित रूप से उस पर समझौते का दबाव बनाया और जातिसूचक गालियां दीं।
अभियोजन के अनुसार विरोध करने पर चारों आरोपियों ने संजय और उसकी पत्नी के साथ मारपीट की। इसी दौरान मुकेश ने कथित रूप से चाकू से संजय के पेट और कंधे पर वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बीच-बचाव करने पहुंची उसकी पत्नी मंजू पर भी चाकू से हमला किया गया, जिससे उसे भी चोटें आईं। पुलिस ने मामले की विवेचना के दौरान आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त चाकू बरामद कर साक्ष्य एकत्रित किए और न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
हत्या के प्रयास के मामले में अदालत का बड़ा फैसला, चार दोषियों को आजीवन कारावास
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों, चिकित्सीय साक्ष्यों तथा दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर आरोप सिद्ध किए। न्यायालय ने सभी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक शशिकांत नागले ने पैरवी की।







