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CISF की जांच में लोहा चोरी के संगठित नेटवर्क के संकेत, BSP मामला निर्णायक मोड़ पर

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CISF investigation points to an organised network of iron theft; BSP case reaches a turning point

भिलाई: छत्तीसगढ़ के भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में करोड़ों रुपये के कथित लोहा चोरी प्रकरण की जांच में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने अहम तथ्यों का पता लगाया है। जांच लगभग पूरी हो चुकी है और इसमें चोरी के लिए अपनाए गए सुनियोजित तौर-तरीकों (मोडस ऑपरेंडी) का खुलासा हुआ है।


सीआईएसएफ अधिकारियों से आज प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच में सामने आया है कि ट्रकों में पहले डस्ट की लोडिंग की जाती थी। इस दौरान लोडिंग प्वाइंट और तौलकांटे पर सीआईएसएफ के जवान तैनात रहते थे। तौल प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार ट्रकों को सीधे संयंत्र से बाहर निकलना चाहिए था, लेकिन कथित रूप से उन्हें ब्रेकडाउन या अन्य तकनीकी कारणों का हवाला देकर रोक लिया जाता था।

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जांच में यह भी सामने आया है कि ट्रकों को पार्किंग क्षेत्र से एसएमएस-3 तक ले जाया जाता था। अधिकारियों का दावा है कि एसएमएस-3 ऐसा क्षेत्र है, जहां न तो सीआईएसएफ की नियमित तैनाती रहती है और न ही वहां सीसीटीवी कैमरों की निगरानी उपलब्ध है। इसी का लाभ उठाकर ट्रकों में कथित रूप से चोरी का लोहा लोड किया जाता था।


जांच के मुताबिक, एसएमएस-3 में सांई एसोसिएट्स के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से ट्रकों में अतिरिक्त लोहा भरा जाता था। चूंकि ट्रकों का वजन पहले ही दर्ज किया जा चुका होता था, इसलिए दोबारा तौल नहीं कराई जाती थी और वाहन सीधे एक्जिट गेट से बाहर निकल जाते थे।


सीआईएसएफ अधिकारियों का दावा है कि जांच में सामने आई थ्योरी से संकेत मिलता है कि इस पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों को पार्किंग से लेकर एसएमएस-3 तक की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र की पूरी जानकारी थी। इसी जानकारी का इस्तेमाल कर कथित तौर पर पूरी योजना को अंजाम दिया जाता था।
सीआईएसएफ की जांच अंतिम चरण में है और संबंधित तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।