नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल मंगलवार को नेताओं के साथ राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और नेता प्रतिपक्ष आतिशी भी मौजूद रहीं। इस दौरान केजरीवाल ने मौजूदा कानूनी विवाद को लेकर ‘सत्याग्रह’ का रास्ता अपनाने की घोषणा की। इससे पहले केजरीवाल और सिसोदिया ने दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि वे इस मामले में आगे न तो खुद अदालत में पेश होंगे और न ही उनका कोई वकील जिरह करेगा। दोनों नेताओं ने अपने फैसले को अंतरात्मा की आवाज बताते हुए कहा कि वे इसके संभावित कानूनी परिणामों का सामना करने के लिए तैयार हैं। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर पूरा सम्मान है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं दिख रही है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं। मामला उस अपील से जुड़ा है, जो सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की है। ट्रायल कोर्ट ने आबकारी मामले में केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। इस अपील पर न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा सुनवाई कर रही हैं। केजरीवाल द्वारा न्यायमूर्ति को मामले से अलग करने की मांग पहले ही खारिज की जा चुकी है। केजरीवाल और सिसोदिया ने अपने पत्र में महात्मा गांधी के सत्याग्रह का हवाला देते हुए कहा कि जब अन्य सभी रास्ते बंद हो जाएं, तो अहिंसक विरोध ही एकमात्र विकल्प बचता है।







