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शाहपुरा में विवाद के बाद प्रशासन का बड़ा एक्शन, अवैध कब्जे पर चला बुलडोजर

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After the dispute in Shahpura, the administration took major action, bulldozer ran on illegal encroachment.

भीलवाड़ा: राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा में इन दिनों एक बड़े सियासी और प्रशासनिक घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र का पारा चढ़ा दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शाहपुरा से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक लालाराम बैरवा द्वारा कथित रूप से गौशाला के नाम पर सरकारी जमीन पर किये गये अवैध कब्जे को आखिरकार प्रशासन ने नेस्तनाबूद कर दिया है। भीलवाड़ा जिला कलेक्टर के कड़े रुख और निर्देश के बाद हरकत में आये स्थानीय प्रशासन ने शुक्रवार को भारी पुलिस जाब्ते के साथ केकड़ी बाईपास राजमार्ग पर धावा बोला। देखते ही देखते प्रशासन का पीला पंजा गरजा और मौके पर किये गये अवैध निर्माण को मटियामेट कर दिया गया। इसके साथ ही चरागाह भूमि पर की गयी करीब 20 बीघा की मजबूत तारबंदी को भी उखाड़ फेंका गया।


इस पूरे मामले का खुलासा मीडिया में होने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया था। चारों तरफ से घिरने के बाद शुक्रवार को प्रशासनिक दल -बल के साथ मौके पर पहुंचा और ‘देव गौशाला सेवा संस्थान’ के नाम पर कब्जायी गयी बेशकीमती चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। इस दौरान मौके पर लिया गया अवैध बिजली का कनेक्शन भी काट दिया गया। राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक, जिला कलेक्टर ने नियमों के तहत इस जमीन के आवंटन के आवेदन को पहले ही पूरी तरह खारिज कर दिया था। इसके बावजूद संस्था द्वारा यहां धड़ल्ले से अवैध निर्माण और तारबंदी कर ली गयी थी। प्रशासन अब तक इस मामले में चुप्पी साधे बैठा था, लेकिन जब मामला तूल पकड़ गया, तो आनन-फानन में यह बड़ी कार्रवाई अमल में लायी गयी।

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इस बड़ी कार्रवाई और बिजली कनेक्शन काटे जाने के बाद शाहपुरा विधायक डॉ लालाराम बैरवा ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट से एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया और इन्हें भ्रामक एवं निराधार बताया। श्री बैरवा ने लिखा, “ मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरा देव गौशाला सेवा संस्था, शाहपुरा अथवा उससे संबंधित किसी भी गतिविधि से वर्तमान में कोई संबंध नहीं है। मैंने वर्ष 2025 में ही उक्त संस्था के सचिव पद एवं सदस्यता से स्वेच्छा से त्यागपत्र दे दिया था।”


श्री बैरवा ने अपने परिवार का बचाव करते हुए दावा किया कि वर्तमान में उनके परिवार का कोई भी सदस्य या रक्त के रिश्ते वाला व्यक्ति इस संस्था से किसी भी रूप में नहीं जुड़ा है। उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग उनके सेवाकाल के पुराने दस्तावेजों को आधार बनाकर उनकी राजनीतिक और सामाजिक छवि को धूमिल करने का असफल प्रयास कर रहे हैं।


इससे पहले उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि वह कोई जमीन हड़पना नहीं चाहते थे, बल्कि वहां करीब आठ लाख रुपये खर्च कर बेसहारा पशुओं के लिए एक अस्पताल और गौवंश के लिए बेहतरीन सुविधाएं विकसित करना चाहते थे। उन्होंने यह भी बताया कि वहां रह रही गायों को अस्थाई रूप से दूसरी जगह सुरक्षित स्थानांतरित कर दिया गया है। ”
फिलहाल, मौके पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई और उसके बाद विधायक की आयी इस सफाई ने शाहपुरा की राजनीति में एक नया उबाल ला दिया है।