दिल्ली:दिल्ली के हरीश राणा की 13 वर्षों लंबी संघर्ष भरी जिंदगी का अंत हो गया। उनका अंतिम संस्कार आज बुधवार को दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क क्षेत्र में किया जाएगा। इस संबंध में जानकारी उनके पिता अशोक राणा के करीबी मित्र दीपांशु मित्तल ने दी। उन्होंने बताया कि हरीश का जीवन बचपन से ही चुनौतियों से भरा रहा और बीते 13 वर्षों का उनका दर्द शब्दों में बयां करना आसान नहीं है।
साल 2013 में हरीश चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान एक गंभीर हादसे का शिकार हो गए थे, जब वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर पड़े। इस दुर्घटना के बाद उनकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई और लंबे समय तक इलाज के बावजूद वह सामान्य जीवन में वापस नहीं लौट सके। इसके बाद वर्ष 2022 में उनके माता-पिता ने इच्छामृत्यु की अनुमति के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन 2024 में याचिका खारिज कर दी गई। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 11 मार्च 2026 को उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति मिल गई। 24 मार्च 2026 को एम्स, दिल्ली में उनका निधन हो गया।
हरीश के निधन की खबर से राज एंपायर सोसायटी में शोक का माहौल है। लोगों के बीच गहरा दुख और एक अजीब सी खामोशी छा गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की पीड़ा है।लोगों ने हरीश के पिता के संघर्ष को असाधारण बताया है। उनका कहना है कि एक पिता का अपने बेटे के लिए इतना लंबा संघर्ष करना और अंततः इच्छामृत्यु की मांग करना इस बात को दर्शाता है कि हालात कितने कठिन रहे होंगे। इस दुख की घड़ी में पूरी सोसायटी परिवार के साथ खड़ी है।







