वर्ल्ड डेस्क: दुनिया के कई देश भूकंप के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं, लेकिन तुर्किये उन देशों में शामिल है जहां विनाशकारी भूकंप बार-बार बड़े पैमाने पर तबाही मचाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार तुर्किये की भौगोलिक स्थिति ही इसकी सबसे बड़ी चुनौती है। यह देश चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के जंक्शन पर स्थित है, जिसके कारण यहां लगातार भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं। तुर्किये का अधिकांश भाग एनाटोलियन प्लेट पर स्थित है, जो अरेबियन, यूरेशियन और अफ्रीकी प्लेटों के दबाव के बीच फंसी हुई है। इसी वजह से यहां बड़ी संख्या में फॉल्ट लाइनें सक्रिय रहती हैं और समय-समय पर शक्तिशाली भूकंप आते हैं।
तुर्किये में मौजूद नॉर्थ एनाटोलियन फॉल्ट लाइन को दुनिया की सबसे खतरनाक फॉल्ट लाइनों में गिना जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस क्षेत्र में भविष्य में भी बड़े भूकंप आने की संभावना बनी हुई है। बीते वर्षों में यहां हजारों भूकंपीय झटके दर्ज किए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
वहीं, जापान, इंडोनेशिया, फिलीपींस, न्यूजीलैंड और रूस का कामचटका क्षेत्र भी प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” का हिस्सा हैं। यह क्षेत्र दुनिया की सबसे सक्रिय भूकंपीय बेल्ट माना जाता है, जहां अक्सर बड़े भूकंप और सुनामी की घटनाएं सामने आती हैं। हाल के वर्षों में कामचटका में आए शक्तिशाली भूकंप ने वैज्ञानिकों को भी चिंतित किया है और इसे आधुनिक दौर के सबसे बड़े भूकंपों में से एक माना गया।
भारत भी भूकंप के खतरे से अछूता नहीं है। हिमालयी क्षेत्र, जिसमें उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम और असम शामिल हैं, उच्च भूकंपीय जोखिम वाले क्षेत्रों में गिने जाते हैं। इसके अलावा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह मेगाथ्रस्ट भूकंप और सुनामी के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे तटीय राज्यों पर भी सुनामी का खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए मजबूत निर्माण, समय पर चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन की तैयारी बेहद जरूरी है।







