SCO Summit 2026: PM Modi's diplomacy in Bishkek attracted attention, special bonding seen with Putin

बिश्केक: किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का शिखर सम्मेलन जारी है। भारत, रूस, चीन, ईरान और पाकिस्तान समेत 10 सदस्य देशों के शीर्ष नेता इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कई अहम द्विपक्षीय मुलाकातें भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

SCO समिट में पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को लेकर बातचीत हुई। भारत और आर्मेनिया के बीच हाल के वर्षों में रक्षा सहयोग में तेजी आई है और भारत ने आर्मेनिया को पिनाका रॉकेट सिस्टम तथा आकाश एयर डिफेंस सिस्टम समेत कई रक्षा उपकरण उपलब्ध कराए हैं।

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इसके बाद पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ बैठक की। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच दोनों नेताओं की मुलाकात को खास अहमियत दी जा रही है। बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

भारत की आर्थिक ताकत का भी संदेश

ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर भी एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ का उल्लेख किया। पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है।

पुतिन के साथ पीएम मोदी की खास मुलाकात

बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात भी सुर्खियों में रही। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। इसके बाद पीएम मोदी और पुतिन एक ही कार में सवार होकर नोमाड गेम्स के उद्घाटन समारोह के लिए रवाना हुए।

दोनों नेताओं का एक साथ कार में सफर करना भारत-रूस के मजबूत संबंधों और दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत समीकरण की झलक के तौर पर देखा जा रहा है। भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है।

बिश्केक में पीएम मोदी की आर्मेनिया, ईरान और रूस के शीर्ष नेताओं के साथ हुई मुलाकातों ने SCO सम्मेलन को भारत की सक्रिय कूटनीति का अहम मंच बना दिया है। इन बैठकों के जरिए भारत क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को लेकर अपनी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाता नजर आ रहा है।