मॉस्को: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है और भारत, चीन जैसे प्रमुख देशों के साथ बराबरी के आधार पर सहयोग रूस की प्राथमिकताओं में शामिल है। हालिया साक्षात्कारों में लावरोव ने पश्चिम के साथ रूस के पुराने संबंधों और NATO को लेकर मॉस्को की शुरुआती सोच का भी जिक्र किया।
लावरोव ने कहा कि रूस अब उभरते हुए प्रमुख शक्ति केंद्रों के साथ समान स्तर पर सहयोग को महत्व देता है। उन्होंने विशेष रूप से भारत और चीन को नए वैश्विक शक्ति केंद्रों के तौर पर रेखांकित किया। उनके अनुसार, BRICS जैसे मंचों का विस्तार इस बदलती वैश्विक व्यवस्था का संकेत है।
NATO से जुड़ने की पुरानी चर्चा का जिक्र
रूस और पश्चिम के रिश्तों पर बात करते हुए लावरोव ने उस दौर को याद किया जब मॉस्को ने NATO के साथ करीबी संबंधों की संभावना पर विचार किया था। सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस और पश्चिम के बीच सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई थी। लावरोव की दलील है कि पश्चिम ने रूस को बराबरी के भागीदार के तौर पर स्वीकार करने के बजाय अपने नेतृत्व वाले ढांचे में देखना पसंद किया।
हालांकि, NATO में रूस के संभावित शामिल होने का सवाल लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है और इस मुद्दे पर अलग-अलग समय में रूस और पश्चिमी नेताओं के बयान सामने आते रहे हैं। लावरोव अब उस इतिहास को मौजूदा रूस-पश्चिम टकराव के संदर्भ में देखते हैं।
भारत के लिए क्या मायने?
लावरोव के बयानों में भारत का प्रमुखता से उल्लेख ऐसे समय हुआ है जब नई दिल्ली BRICS की 2026 की अध्यक्षता कर रहा है और रूस-भारत आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने ऊर्जा, व्यापार और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने की कोशिश की है।
भारत, रूस और चीन के बीच त्रिपक्षीय RIC व्यवस्था को फिर सक्रिय करने की संभावना का समर्थन भी लावरोव पहले व्यक्त कर चुके हैं। उनका कहना है कि भारत-चीन संबंधों में सुधार इस प्रारूप को दोबारा सक्रिय करने का रास्ता खोल सकता है।
बहुध्रुवीय दुनिया पर रूस का जोर
लावरोव लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि वैश्विक व्यवस्था एकध्रुवीय प्रभुत्व से आगे बढ़कर बहुध्रुवीय स्वरूप ले रही है। उनके हालिया बयानों में BRICS, SCO और अन्य गैर-पश्चिमी मंचों को इसी बदलाव के प्रमुख उदाहरण के रूप में पेश किया गया है। उन्होंने कहा है कि पश्चिम की नीतियां इस प्रक्रिया को धीमा कर सकती हैं, लेकिन इसे रोक नहीं सकतीं।
इस बीच, भारत की BRICS अध्यक्षता और रूस-चीन के समर्थन से बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने की कोशिशें भी तेज हुई हैं। ऐसे में लावरोव का भारत का उल्लेख नई वैश्विक व्यवस्था में नई दिल्ली की बढ़ती भूमिका के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।







