नयी दिल्ली: जेल में बंद जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) प्रमुख यासीन मलिक ने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक से वैवाहिक संबंध खत्म करने का फैसला किया है। मलिक ने 25 पन्नों के हलफनामे में अपनी लंबी जेल अवधि और संभावित मौत की सजा का हवाला देते हुए यह निर्णय लेने की बात कही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मलिक ने कहा कि वह अपनी पत्नी को अपनी परिस्थितियों के बोझ से मुक्त करना चाहते हैं, ताकि वह अपनी बाकी जिंदगी स्वतंत्र रूप से जी सकें। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करने के बाद यह फैसला लिया है।
यासीन मलिक ने अपने खिलाफ चल रहे सरला भट हत्या मामले में आरोपों से इनकार किया है। उनका दावा है कि अप्रैल 1990 में सरला भट के अपहरण और हत्या के समय वह खुद गंभीर रूप से घायल थे और कथित तौर पर लंबे समय तक बेहोश रहे थे। उन्होंने मामले में स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) की चार्जशीट को भी खारिज करते हुए इसे कई वर्षों बाद तैयार की गई कहानी बताया है।
मलिक ने अदालत में चल रही कार्यवाही में आगे हिस्सा नहीं लेने की बात भी कही है। साथ ही उन्होंने अदालत से अपने लिए मौत की सजा की मांग की है। हालांकि, यह कदम उनके खिलाफ लगाए गए अन्य आरोपों की स्थिति को स्वत: नहीं बदलता और सरला भट मामले में दोष या निर्दोषता का अंतिम फैसला अदालत द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना है।
यासीन मलिक को वर्ष 2022 में दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के वित्तपोषण और अलगाववादी गतिविधियों से जुड़े मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा उन पर 1990 में भारतीय वायुसेना के जवानों पर हमले और 1989 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण समेत अन्य मामलों में भी आरोप हैं।
कौन हैं मुशाल हुसैन मलिक?
मुशाल हुसैन मलिक पाकिस्तान की नागरिक हैं और उन्होंने 2009 में यासीन मलिक से शादी की थी। दोनों की मुलाकात वर्ष 2005 में पाकिस्तान में हुई थी। मुशाल को वर्ष 2023 में पाकिस्तान की तत्कालीन कार्यवाहक सरकार में मानवाधिकार और महिला सशक्तिकरण मामलों का विशेष सलाहकार नियुक्त किया गया था।
यासीन मलिक के तलाक के फैसले को लेकर राजनीतिक और सुरक्षा मामलों के विश्लेषकों के बीच अलग-अलग राय सामने आई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि हलफनामे में व्यक्तिगत परिस्थितियों और लंबे कारावास पर जोर देकर मलिक अपने पक्ष को एक अलग राजनीतिक और मानवीय नजरिये से पेश करने का प्रयास कर रहे हैं।
हालांकि, उनके खिलाफ लंबित मामलों में आरोपों की कानूनी स्थिति अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगी।







