China: इस सप्ताह चीन कई बड़े घटनाक्रमों को लेकर वैश्विक सुर्खियों में रहा। एक ओर देश में दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक प्रवेश परीक्षा गाओकाओ (Gaokao) आयोजित की गई, जिसमें रिकॉर्ड 1.29 करोड़ छात्रों ने हिस्सा लिया, वहीं दूसरी ओर फीफा विश्व कप में राष्ट्रीय टीम की गैरमौजूदगी के बावजूद चीनी कंपनियों और उत्पादों की मजबूत उपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। इसके साथ ही अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव तथा राष्ट्रपति Xi Jinping की कूटनीतिक गतिविधियां भी अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में रहीं।
गाओकाओ को चीन की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर छात्रों का देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश तय होता है। परीक्षा को निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए। परीक्षा केंद्रों के आसपास निर्माण कार्यों पर रोक लगाई गई, यातायात मार्ग बदले गए और सुरक्षा व्यवस्था को विशेष रूप से मजबूत किया गया। इस परीक्षा को चीन में सामाजिक और आर्थिक उन्नति का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है, हालांकि छात्रों पर इसके कारण भारी मानसिक दबाव भी रहता है।
फीफा विश्व कप में चीन की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम भले ही हिस्सा नहीं ले सकी, लेकिन चीनी कंपनियों का प्रभाव साफ दिखाई दिया। कई प्रमुख चीनी ब्रांड टूर्नामेंट से जुड़े रहे और चीनी उत्पादों की मौजूदगी मैदान से लेकर बाजार तक महसूस की गई। तकनीकी साझेदारियों और आधिकारिक लाइसेंसिंग समझौतों के जरिए चीन ने अपनी आर्थिक और व्यावसायिक ताकत का प्रदर्शन किया।
इसी बीच अमेरिका ने Alibaba, Baidu और BYD जैसी प्रमुख चीनी कंपनियों को कथित तौर पर “चीनी सैन्य कंपनियों” की सूची में शामिल कर दिया। इस कदम पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे अपनी कंपनियों को अनुचित रूप से निशाना बनाने की कोशिश बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, खेल, व्यापार और कूटनीति से जुड़े ये घटनाक्रम इस बात का संकेत हैं कि चीन न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी उपस्थिति और प्रभाव को लगातार मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।







