कर्नाटक: कर्नाटक सरकार ने शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar के नेतृत्व वाली सरकार ने विभिन्न जनसेवा और प्रशासनिक सुधार से जुड़े विभागों को एकीकृत करते हुए नए ‘प्रजा सेवा विभाग’ के गठन को मंजूरी दे दी है। राज्य मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद 24 जून को जारी सरकारी आदेश के जरिए इस नई व्यवस्था को औपचारिक रूप दिया गया।
सरकार के अनुसार, प्रजा सेवा विभाग राज्य में नागरिकों की शिकायतों के निवारण, प्रशासनिक सुधारों के क्रियान्वयन, सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और जनसेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। इस नई संरचना के तहत प्रशासनिक सुधार प्रकोष्ठ, लोक शिकायत प्रभाग और सकाला मिशन को एक ही विभाग के अंतर्गत समाहित कर दिया गया है।
नया विभाग जनस्पंदन और सकाला जैसी प्रमुख जनसेवा पहलों की निगरानी भी करेगा। इसका उद्देश्य नागरिकों की शिकायतों और सेवा संबंधी अनुरोधों का त्वरित एवं निर्धारित समय सीमा के भीतर समाधान सुनिश्चित करना है। सरकार का मानना है कि विभिन्न इकाइयों को एक मंच पर लाने से विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी बनेगी।
इस प्रशासनिक पुनर्गठन को मजबूत आधार देने के लिए सरकार ने 73 नए पदों को मंजूरी दी है। साथ ही, संबंधित विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को एकीकृत प्रशासनिक ढांचे में शामिल किया गया है। इससे कार्यों की दोहराव वाली प्रक्रियाओं में कमी आएगी और सेवा वितरण प्रणाली अधिक सुव्यवस्थित होगी।
अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य शासन में जवाबदेही, पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा देना है। साथ ही नागरिकों और सरकारी संस्थानों के बीच संवाद को अधिक सरल और प्रभावी बनाना भी इसका अहम लक्ष्य है। विशेषज्ञ इसे कर्नाटक में सुशासन और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देख रहे हैं, जिससे आम लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ अधिक तेजी और आसानी से मिल सकेगा।







