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‘सतलुज’ फिल्म पर रोक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दमन, प्रतिबंध हटाए सरकार: जत्थेदार

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Ban on film 'Satluj' is suppression of freedom of expression, government should lift the ban: Jathedar

अमृतसर: श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ के भारत में प्रदर्शन पर रोक लगाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सच्चाई को दबाने का प्रयास बताते हुए सरकार से फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति देने की मांग की।
यहां मंगलवार को जारी प्रेस बयान में जत्थेदार गड़गज्ज ने कहा कि जब पूरी दुनिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा को महत्व देती है, ऐसे समय में भारत में सिख अल्पसंख्यकों पर हुए अत्याचारों की सच्चाई को देश और दुनिया के सामने आने से रोकना असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में जब सिख युवाओं के कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों और गैर-न्यायिक हत्याओं के मामले सामने आये, तब मानवाधिकार कार्यकर्ता भाई जसवंत सिंह खालड़ा ने बड़ी मेहनत से रिकॉर्ड एकत्र कर इन घटनाओं को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने कहा कि भाई खालड़ा की कहानी मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन को उजागर करती है और यह साबित करती है कि सच्चाई को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता।

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जत्थेदार ने कहा कि जब देश में अन्य समुदायों, विशेषकर बहुसंख्यक समाज पर आधारित घटनाओं को दर्शाने वाली फिल्मों का प्रदर्शन बिना रोक-टोक होता है, तो सिख समुदाय पर हुए अत्याचारों को दिखाने वाली फिल्म को रोकना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह व्यापक दृष्टिकोण अपनाते हुए भाई जसवंत सिंह खालड़ा द्वारा उजागर किये गये तथ्यों को देश की जनता तक पहुंचने दे और ‘सतलुज’ फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति दे। उन्होंने कहा कि सच्चाई से जितना भागने की कोशिश की जाती है, वह उतनी ही मजबूती से सामने आती है और अपराध करने वाले हमेशा कानून से बच नहीं सकते।


उन्होंने कहा कि सिख युवाओं के कथित फर्जी मुठभेड़ों से जुड़े मामलों की सच्चाई समय-समय पर मोहाली स्थित सीबीआई अदालत के फैसलों के माध्यम से सामने आती रही है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में पंजाब पुलिस के अधिकारियों को दोषी ठहराया जा चुका है। ऐसे में सरकार को पंजाब और सिख समुदाय के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से जून 1984 के बाद के दशक में सिखों की हत्याओं और कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों से जुड़े मामलों में गंभीरता से कार्रवाई कर न्याय सुनिश्चित करने की भी मांग की।
जत्थेदार ने कहा कि सिख समुदाय लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है और ‘सतलुज’ फिल्म पर रोक लगाये जाने से सिखों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।