लखनऊ: अयोध्या में आयोजित होने वाला दीपोत्सव-2026 इस बार दीपों की रोशनी के साथ देश की विविध लोक संस्कृतियों और पारंपरिक कलाओं का भव्य संगम भी बनेगा। रामनगरी की सड़कों, शोभायात्राओं और सांस्कृतिक मंचों पर देश के विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकार अपनी पारंपरिक नृत्य और संगीत विधाओं की प्रस्तुतियां देंगे। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, राजस्थान, बिहार, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कलाकार इस आयोजन में शामिल होंगे।
प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दीपोत्सव में उत्तर प्रदेश की लोककलाएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। मथुरा का मयूर और बम रसिया, प्रयागराज का ढेढ़िया, बांदा का पाई डंडा तथा सोनभद्र का मांदल-सिंघा और करमा नृत्य दर्शकों को आकर्षित करेंगे। अयोध्या के कलाकार बधावा, फरुवाही, डमरू और शंख नृत्य प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही गाजीपुर का धोबिया, गोरखपुर का वनटांगिया, पीलीभीत का थारू, झांसी का राई, सुलतानपुर का नटवरी और बहराइच का डोमकच नृत्य भी कार्यक्रम का हिस्सा होगा।
मंत्री के अनुसार, दूसरे राज्यों की लोककलाओं को भी इस आयोजन में प्रमुखता दी गई है। पश्चिम बंगाल के कलाकार श्रीखोल, जबकि ओडिशा के कलाकार मास्क डांस, शाही जात्रा, रणप्पा चढैय्या और शंख वादन प्रस्तुत करेंगे। झारखंड का पुरुलिया छऊ, मध्य प्रदेश का गुदुम बाजा, कर्नाटक का ढोलु कुनीथा और गुजरात का तलवार रास भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शोभा बढ़ाएंगे।
राजस्थान का घूमर और चरी, बिहार की झिझिया तथा चेन्नई के कावड़ी, कड़गम और मयूर नृत्य के साथ आंध्र प्रदेश का बोनालू भी दर्शकों को देखने को मिलेगा। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों की वेशभूषा, संगीत और नृत्य परंपराओं की झलक मिलेगी।
दीपोत्सव की शोभायात्रा में भी लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से उत्सव को खास बनाएंगे। इसमें प्रयागराज का ढेढ़िया, मथुरा का मयूर, बांदा का पाई डंडा, सोनभद्र का मांदल-सिंघा और अयोध्या का बधावा नृत्य शामिल होगा। आजमगढ़ के कलाकार धोबिया नृत्य और प्रयागराज के कलाकार कबीरी गायन प्रस्तुत करेंगे।
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि दीपोत्सव के जरिए भारतीय लोक संस्कृति और परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि यह आयोजन पारंपरिक कलाओं के संरक्षण, प्रोत्साहन और नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।







