पीएम मोदी ने लिकटेंस्टीन के शाही जोड़े से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा
PM Modi meets the Princely Couple of Liechtenstein; discusses bilateral relations

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में भारत की राजकीय यात्रा पर आए लिकटेंस्टीन के हेरेडिटरी प्रिंस एलॉइस और हेरेडिटरी प्रिंसेस सोफी से मुलाकात की। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और लिकटेंस्टीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना तथा व्यापार, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाना है।

प्रधानमंत्री मोदी और हेरेडिटरी प्रिंस एलॉइस के बीच द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देशों के संबंधों को विस्तार देने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी है। इससे पहले राष्ट्रपति भवन में आयोजित औपचारिक स्वागत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी ने शाही जोड़े का स्वागत किया। इस अवसर पर एलॉइस ने भारत की अपनी पहली राजकीय यात्रा को सम्मान की बात बताया और कहा कि यह यात्रा लिकटेंस्टीन के लिए भारत के साथ संबंधों के महत्व को दर्शाती है।

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शाही जोड़े ने राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी दी। वहां उन्होंने पुष्पचक्र अर्पित किया और आगंतुक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी भी मौजूद रहे।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी हेरेडिटरी प्रिंस एलॉइस से मुलाकात की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि भारत और लिकटेंस्टीन के संबंधों में व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (टीईपीए) से नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उनके अनुसार, इस समझौते के कारण दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग की गति बढ़ रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठक को लेकर भी उम्मीद जताई।

हेरेडिटरी प्रिंस एलॉइस ने कहा कि भारत के साथ व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने नवाचार, उन्नत विनिर्माण, वित्तीय सेवाओं, शिक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों की क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं, जिनका इस्तेमाल दीर्घकालिक लाभ के लिए किया जा सकता है।

भारत और लिकटेंस्टीन के बीच बढ़ता संपर्क आर्थिक सहयोग के साथ-साथ तकनीकी और शैक्षणिक साझेदारी को भी नई दिशा देने की संभावना रखता है।