नयी दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश में समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जहाजों और बंदरगाहों के लिए नए और कड़े नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले जहाजों को रोका जा सकेगा। साथ ही, जहाज मालिकों, शिपिंग कंपनियों और बंदरगाह संचालकों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025 के तहत मर्चेंट शिपिंग (शिप्स एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी) नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। इन नियमों ने वर्ष 2024 के पुराने प्रावधानों का स्थान लिया है। इसका उद्देश्य जहाजों, बंदरगाहों और समुद्री परिवहन से जुड़ी सुविधाओं की सुरक्षा को बेहतर बनाना है।
वैध सुरक्षा प्रमाणपत्र जरूरी
नए नियमों के अनुसार, वैध सुरक्षा प्रमाणपत्र के बिना संचालित होने वाले अंतरराष्ट्रीय और तटीय जहाजों को आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने तक रोका जा सकता है। ऐसे मामलों में जहाज मालिक को आठ लाख रुपये का निर्धारित शुल्क देना होगा। आगमन-पूर्व सुरक्षा सूचना में गलत जानकारी देने पर जहाज को सही विवरण मिलने तक रोका जा सकता है। इस उल्लंघन के लिए दो लाख रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है।
96 घंटे पहले देनी होगी सूचना
भारतीय बंदरगाहों पर प्रवेश करने वाले प्रत्येक जहाज के लिए आगमन-पूर्व सुरक्षा अधिसूचना देना अनिवार्य होगा। सामान्य परिस्थितियों में यह सूचना आगमन से कम से कम 96 घंटे पहले देनी होगी। 96 घंटे से कम की यात्रा होने पर पिछले बंदरगाह से प्रस्थान के दो घंटे के भीतर सूचना प्रस्तुत करनी होगी।
योग्य कंपनी सुरक्षा अधिकारी नियुक्त नहीं करने या उनके संबंध में गलत जानकारी देने वाली शिपिंग कंपनियों पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। बार-बार नियमों का उल्लंघन करने पर अतिरिक्त पांच लाख रुपये का जुर्माना और संबंधित जहाज का सुरक्षा प्रमाणपत्र वापस लेने की कार्रवाई की जा सकती है।
सुरक्षा उपकरणों और ऑडिट पर सख्ती
निर्धारित सुरक्षा उपकरणों की कमी या खराबी होने पर जहाज को रोका जा सकता है। प्रत्येक खराब या गायब उपकरण के लिए एक लाख रुपये का शुल्क लगेगा। सुरक्षा संबंधी घटनाओं की सूचना महानिदेशक पोत परिवहन को नहीं देने पर दो लाख रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है।
नियमों के तहत जहाजों को हर तीन महीने में कम से कम एक बार सुरक्षा अभ्यास करना होगा। बंदरगाहों को अनुमोदित सुरक्षा योजनाएं बनाए रखनी होंगी, योग्य सुरक्षा अधिकारी नियुक्त करने होंगे और वार्षिक सुरक्षा सत्यापन कराना होगा। सुरक्षा ऑडिट में विफलता पर दो लाख रुपये तथा सुरक्षा मूल्यांकन या योजना प्रस्तुत नहीं करने पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।
नए प्रावधानों में समुद्री प्राधिकरणों, सीमा शुल्क, खुफिया एजेंसियों, पुलिस, भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के बीच समन्वय पर भी जोर दिया गया है। ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से प्रभावी होंगे और संबंधित भारतीय जहाजों, बंदरगाहों, अपतटीय सुविधाओं तथा भारतीय बंदरगाहों पर आने वाले विदेशी जहाजों पर लागू होंगे।







