आईआईटी रुड़की और कैलगरी विश्वविद्यालय में संयुक्त डॉक्टरेट समझौता
Joint Doctoral Agreement between IIT Roorkee and the University of Calgary

रुड़की: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की और कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ कैलगरी ने संयुक्त डॉक्टरेट उपाधि कार्यक्रम शुरू करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते को कनाडा के कैलगरी में आयोजित एक विशेष समारोह में औपचारिक रूप दिया गया। इस साझेदारी का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग, अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाओं के विकास को बढ़ावा देना है।

आईआईटी रुड़की के अनुसार, हस्ताक्षर समारोह में संस्थान के निदेशक प्रो. केके पंत, अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अधिष्ठाता प्रो. करुण रावत, शैक्षणिक मामलों के अधिष्ठाता प्रो. नवीन नवानी समेत अन्य संकाय सदस्य मौजूद रहे। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलगरी की ओर से शैक्षणिक मामलों की उपाध्यक्ष एवं प्राध्यापक डॉ. सैंड्रा डेविडसन, स्नातक अध्ययन संकाय की अधिष्ठाता डॉ. तारा बीट्टी, शुलिख स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के अधिष्ठाता डॉ. एंडर्स न्यग्रेन और सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख डॉ. गोपाल आचारी समेत कई अधिकारी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

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आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. पंत ने कहा कि दोनों संस्थानों की पूरक विशेषज्ञताओं को एक साथ लाकर अंतर्विषयक अनुसंधान के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त डॉक्टरेट कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शोध प्रतिभाओं को विकसित करने और अनुसंधान को ऐसी तकनीकों में बदलने में मदद करेगा, जो सामाजिक एवं औद्योगिक चुनौतियों के समाधान में उपयोगी हों।

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलगरी की डॉ. सैंड्रा डेविडसन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक साझेदारियां अनुसंधान को आगे बढ़ाने के साथ विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर जुड़े वातावरण के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों संस्थानों के बीच पहले से मौजूद सहयोग को और मजबूत करेगा तथा डॉक्टरेट विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों को संयुक्त रूप से अध्ययन और अनुसंधान करने के अवसर देगा।

दोनों संस्थानों ने शैक्षणिक आदान-प्रदान बढ़ाने, सहयोगात्मक अनुसंधान को मजबूत करने और नवाचार आधारित दीर्घकालिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। अधिकारियों के अनुसार, यह सहयोग शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में दोनों संस्थानों के वैश्विक जुड़ाव को और विस्तार देगा।