नयी दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में ‘वोट चोरी’ के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया गया है और इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका है। राहुल गांधी ने ये आरोप विपक्षी दलों के सांसदों के ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च के दौरान लगाए।
राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसद संसद से निर्वाचन सदन की ओर मार्च कर रहे थे। पुलिस ने आकाशवाणी भवन के सामने उन्हें रोक दिया। राहुल गांधी ने कहा कि करीब 300 लोकसभा और राज्यसभा सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा उनके सहयोगियों से मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन उन्हें निर्वाचन आयोग तक जाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि सांसद जनता के प्रतिनिधि हैं और चुनाव संबंधी मुद्दों पर निर्वाचन आयोग से संवाद करना उनका अधिकार है।
मार्च के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कुछ सांसदों ने वहीं धरना दिया। पुलिस उन्हें समझाकर आकाशवाणी भवन के भीतर ले गई। कई घंटे वहां रहने के बाद जब प्रदर्शनकारी बाहर आए तो उन्होंने आगे बढ़ने से इनकार किया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
हिरासत में लिए जाने से पहले राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा के लिए आंदोलन कर रहा है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि इस प्रक्रिया के नाम पर देश के साथ जो कुछ हुआ, उसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
राहुल गांधी ने दावा किया कि बड़ी संख्या में सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मिलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि देश के निर्वाचित प्रतिनिधियों को चुनाव आयोग से मिलने की अनुमति नहीं मिलेगी तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठेंगे।
कांग्रेस नेता ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, मोहन भागवत और ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र को कमजोर करने में मदद करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इन मुद्दों को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखेगा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेगा। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं।







