कानपुर। 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ने के मामले में कानपुर नगर ने प्रदेश में प्रमुख स्थान हासिल किया है। नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक 1,10,249 आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाए जा चुके हैं। कार्ड बनाने के मामले में कानपुर नगर जौनपुर, लखनऊ, वाराणसी और प्रयागराज समेत कई प्रमुख जिलों से आगे है।
आंकड़ों के मुताबिक जौनपुर में 96,795, लखनऊ में 87,928, वाराणसी में 82,783, हरदोई में 79,433, प्रयागराज में 78,807, आगरा में 77,038, गोरखपुर में 75,308, आजमगढ़ में 72,948 और गाजीपुर में 68,707 कार्ड बनाए जा चुके हैं। योजना के लिए आर्थिक स्थिति की कोई बाध्यता नहीं है। 70 वर्ष या इससे अधिक आयु का प्रत्येक पात्र वरिष्ठ नागरिक आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनवा सकता है। इसके लिए आधार कार्ड में दर्ज उम्र मान्य होती है और आधार आधारित ई-केवाईसी जरूरी है।
कार्डधारकों को योजना के तहत पांच लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है। योजना में 27 चिकित्सा विशेषज्ञताओं से जुड़ी 1,961 उपचार प्रक्रियाएं शामिल हैं। इनमें हृदय रोग, कैंसर, हड्डी एवं जोड़ संबंधी बीमारियां, सामान्य सर्जरी, डायलिसिस, स्ट्रोक, एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर तथा हिप और घुटने से संबंधित उपचार शामिल हैं।
योजना के नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. एसपी यादव ने बताया कि पात्र बुजुर्गों को योजना से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर और विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर कार्ड बनाने के साथ योजना के लाभों की जानकारी भी दे रही हैं। उनके अनुसार जिले में बड़ी संख्या में कार्ड बनना विभागीय टीमों के लगातार प्रयास का परिणाम है।
कल्याणपुर निवासी 76 वर्षीय राजेंद्र कटियार को हृदय संबंधी बीमारी के उपचार में वय वंदना कार्ड का लाभ मिला और उनका पेसमेकर लगाया गया। बर्रा निवासी 72 वर्षीय राजरानी ने कैंसर के उपचार में कार्ड का इस्तेमाल किया। वहीं 74 वर्षीय किरण देवी को घुटने की गंभीर समस्या के इलाज में योजना से सहायता मिली। लाभार्थियों के अनुसार कार्ड के जरिए उपचार मिलने से इलाज के खर्च का आर्थिक दबाव कम हुआ है।







