जमूहार (रोहतास)। गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय (GNSU), जमूहार में देशभर के करीब 500 युवा इतिहासकारों का जुटान होने जा रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘दशम युवा इतिहासकार’ का आयोजन किया जाएगा। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले युवा इतिहासकार भारतीय इतिहास, संस्कृति, स्थानीय इतिहास और इतिहास लेखन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।
संगोष्ठी की तैयारियों को लेकर विश्वविद्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे पत्रकारों को कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य की जानकारी दी गई। विश्वविद्यालय के प्रतिकुलाधिपति गोविंद नारायण सिंह ने पत्रकारों को संगोष्ठी में आमंत्रित करते हुए आयोजन को सफल बनाने में सहयोग की अपील की।
उन्होंने कहा कि इतिहास को जानने और समझने की जिज्ञासा लोगों में हमेशा रही है, लेकिन नई पीढ़ी और विशेषकर युवाओं को इतिहास से जोड़ना जरूरी है। इसी उद्देश्य से संगोष्ठी में युवा इतिहासकारों की भागीदारी को प्रमुखता दी गई है। उनका कहना है कि अलग-अलग क्षेत्रों से आए युवा शोधकर्ता इतिहास के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे और नई दृष्टि विकसित करने का प्रयास करेंगे।
गोविंद नारायण सिंह ने कहा कि इतिहास का अध्ययन केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इतिहास के कई महत्वपूर्ण पहलू ऐसे हैं, जिनका उल्लेख पुस्तकों में पर्याप्त रूप से नहीं मिलता। ऐसे विषयों को शोध, संवाद और चर्चा के माध्यम से सामने लाने की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से मगध क्षेत्र के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के कई अनछुए पहलुओं पर अभी और शोध की जरूरत है।
राष्ट्रीय संगोष्ठी में विभिन्न राज्यों से करीब 500 युवा इतिहासकारों के शामिल होने की संभावना है। दो दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम में इतिहास, संस्कृति, स्थानीय विरासत और इतिहास लेखन से जुड़े विषयों पर मंथन होगा। आयोजकों के अनुसार, युवा इतिहासकारों को एक मंच पर लाकर विचारों का आदान-प्रदान कराना कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है।
प्रेस वार्ता में ‘दशम युवा इतिहासकार’ से जुड़े पदाधिकारी सुरेश पांडेय, विकास कुमार सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। पत्रकारों ने कार्यक्रम और इसके उद्देश्यों से जुड़े विभिन्न सवाल भी पूछे।







