गया। गयाजी की पवित्र धरती पर पिंडदान को लेकर देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था लगातार देखने को मिल रही है। फल्गु नदी के तट, विष्णुपद मंदिर और विभिन्न पिंड वेदियों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के साथ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म कर रहे हैं।
विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला महासंगम में अब तक 20 लाख 71 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के गयाजी पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अकेले एक अक्टूबर को करीब 4 लाख 10 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात कही गई। मेले के दौरान विष्णुपद मंदिर से लेकर फल्गु नदी के तट और विभिन्न पिंड वेदियों तक धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला जारी है।
इस बार पितृपक्ष मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं के साथ विदेशी श्रद्धालुओं की मौजूदगी भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। जर्मनी, स्पेन, इटली, नीदरलैंड और पुर्तगाल से पहुंचे कई श्रद्धालुओं ने विष्णुपद क्षेत्र और फल्गु नदी के तट पर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान और तर्पण किया।
विदेशी श्रद्धालुओं की ओर से किए जा रहे धार्मिक अनुष्ठान यह दर्शाते हैं कि पूर्वजों के प्रति सम्मान और श्रद्धा की भावना देश की सीमाओं तक सीमित नहीं है। अलग-अलग देशों और भाषाओं से आए लोगों ने गयाजी की धार्मिक परंपराओं में भाग लेकर यहां की संस्कृति और आस्था से जुड़ने का अनुभव किया।
श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन की ओर से भी व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। गांधी मैदान में टेंट सिटी, बुजुर्गों के लिए व्हीलचेयर, पहचान और सुविधा के लिए क्यूआर कोड तथा भाषा संबंधी समस्या दूर करने के लिए एआई आधारित भाषा अनुवाद की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा मेडिकल सहायता शिविरों के माध्यम से श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सेवाएं भी दी जा रही हैं।
मेले में साफ-सफाई, पेयजल, सुरक्षा और आवागमन जैसी व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इन सुविधाओं से उन्हें धार्मिक अनुष्ठान करने में सहूलियत मिल रही है।
फल्गु नदी के तट पर मंत्रोच्चार, पिंडदान और तर्पण के बीच गयाजी का पितृपक्ष मेला आस्था, परंपरा और पूर्वजों के प्रति सम्मान का व्यापक संगम बना हुआ है।







