कोलकाता: पश्चिम बंगाल के प्रस्तावित ‘पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026’ को लेकर राज्य में राजनीतिक और कानूनी विवाद बढ़ गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उन रिपोर्टों को खारिज किया है, जिनमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटाए जाने की बात कही गई थी। उन्होंने दावा किया कि विधेयक अभी केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास विचाराधीन है और राष्ट्रपति तक नहीं पहुंचा है।
अधिकारी ने कहा कि विधेयक गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव स्तर पर है। उनके मुताबिक, विधेयक में नशीले पदार्थों से जुड़े प्रावधानों को लेकर केंद्र के साथ प्रक्रिया चल रही है। राज्य सरकार चाहती है कि कुछ ड्रग्स संबंधी अपराधों में जमानत के प्रावधान को सख्त किया जाए।
हालांकि, इससे पहले प्रकाशित रिपोर्टों में कहा गया था कि राष्ट्रपति ने विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटाया है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांसेज (NDPS) कानून और प्रस्तावित प्रावधानों के बीच संभावित टकराव का मुद्दा उठाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र ने इसे मौजूदा केंद्रीय कानून के तहत नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में समानांतर निवारक कार्रवाई की व्यवस्था बनने की आशंका से जोड़ा।
जून में विधानसभा से पारित विधेयक में ‘असामाजिक गतिविधियों’ और ‘गुंडा’ की परिभाषा के साथ निवारक हिरासत तथा किसी व्यक्ति को एक साल तक किसी निर्धारित क्षेत्र, जिले या जिलों से बाहर रखने का प्रावधान शामिल है।
विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना की है। वहीं, मुख्यमंत्री ने कानून लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। अब इस मामले में केंद्र और राज्य के बीच विधेयक की आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।







