पलक्कड़: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) पलक्कड़ ने रक्त का थक्का जमने की प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक उन्नत फ्लोरोसेंट कीमो सेंसर विकसित किया है। यह सेंसर हेपरिन की मात्रा की निगरानी में मदद कर सकता है, जिसका इस्तेमाल कई गंभीर चिकित्सा प्रक्रियाओं में एंटीकोआगुलंट के रूप में किया जाता है।
नया सेंसर कार्डियक सर्जरी, डायलिसिस, रक्त आधान और अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान हेपरिन की उचित मात्रा बनाए रखने में उपयोगी हो सकता है। इन प्रक्रियाओं में हेपरिन का स्तर संतुलित रखना जरूरी होता है, ताकि रक्त का थक्का बनने और अत्यधिक रक्तस्राव दोनों के जोखिम को नियंत्रित किया जा सके।
यह शोध रसायन विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. शनमुगराजू शंकरसेकरन और शोधकर्ता नौशिजा एम की देखरेख में किया गया। सेंसर को हेपरिन की निगरानी के पारंपरिक तरीकों की कुछ सीमाओं को दूर करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
विशेष रूप से डिजाइन किए गए सेंसर मॉलिक्यूल पीले-हरे रंग का फ्लोरोसेंट संकेत देते हैं, जिसकी तीव्रता हेपरिन की मौजूदगी में कम हो जाती है। फ्लोरोसेंस में इस बदलाव को मापकर अपेक्षाकृत सरल उपकरणों की मदद से हेपरिन की मात्रा का पता लगाया जा सकता है।
डॉ. शनमुगराजू के अनुसार, यह तकनीक सरलता और सटीकता को जोड़ती है तथा भविष्य में तेज और भरोसेमंद हेपरिन निगरानी प्रणालियों के विकास में उपयोगी हो सकती है।







