What to eat during a fast and what to avoid? Learn the simple rules of a sattvic diet.

Fasting Food Rules: हिंदू धर्म में व्रत और उपवास की परंपरा बेहद पुरानी है। व्रत को केवल भोजन न करने से जोड़कर नहीं देखा जाता, बल्कि इसे शरीर, मन और विचारों पर संयम रखने का माध्यम भी माना जाता है। यही कारण है कि व्रत के दौरान खान-पान को लेकर भी विशेष नियम और परंपराएं प्रचलित हैं।

व्रत में क्यों खाया जाता है सात्विक भोजन?

धार्मिक मान्यताओं में सात्विक भोजन को सादा, शुद्ध और हल्का माना जाता है। व्रत के दौरान बहुत अधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन करने से भारीपन या सुस्ती महसूस हो सकती है। इसलिए कई लोग इस दौरान हल्के और सीमित भोजन को प्राथमिकता देते हैं।

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व्रत का उद्देश्य केवल भूखा रहना नहीं, बल्कि संयम के साथ पूजा-पाठ, ध्यान और धार्मिक गतिविधियों में मन लगाने से भी जुड़ा है। हालांकि, भोजन से जुड़े नियम अलग-अलग व्रत और परंपराओं के अनुसार बदल सकते हैं।

फलाहार से लेकर मखाना और ड्राई फ्रूट्स तक

व्रत के दौरान फलाहार को आम विकल्प माना जाता है। सेब, केला, अनार, पपीता और नारियल जैसे फलों का सेवन किया जा सकता है। ऊर्जा के लिए कई लोग मखाना, बादाम, अखरोट, काजू और अन्य सूखे मेवे भी लेते हैं।

दूध, दही और छाछ भी कई व्रतों में खाए-पीए जाते हैं। हालांकि, जिन लोगों को किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी या असहिष्णुता है, उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार विकल्प चुनना चाहिए।

अनाज की जगह खाए जाते हैं ये खाद्य पदार्थ

कई हिंदू व्रतों में गेहूं, चावल और सामान्य दालों का सेवन नहीं किया जाता। इनके स्थान पर कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना और राजगीरा जैसी चीजों से बने व्यंजन खाए जाते हैं।

आलू और शकरकंद भी व्रत के दौरान लोकप्रिय खाद्य पदार्थ हैं। इनसे हल्की सब्जी, टिक्की या अन्य फलाहारी व्यंजन बनाए जा सकते हैं। हालांकि, इन्हें बहुत ज्यादा तेल में तलने से बचना बेहतर माना जाता है।

सेंधा नमक का इस्तेमाल क्यों?

व्रत के दौरान सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल करने की धार्मिक परंपरा कई जगहों पर देखने को मिलती है। इसे फलों, सलाद और फलाहारी व्यंजनों में स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

हालांकि, सेंधा नमक भी मुख्य रूप से नमक ही है। इसलिए इसे सामान्य नमक की तुलना में असीमित मात्रा में खाना स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित नहीं माना जाना चाहिए। कुल नमक की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।

व्रत में किन चीजों से किया जाता है परहेज?

व्रत के नियम परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं, लेकिन कई हिंदू व्रतों में आमतौर पर गेहूं, चावल, दाल, चना और मटर जैसी चीजों से परहेज किया जाता है। कई परंपराओं में प्याज और लहसुन का सेवन भी नहीं किया जाता।

मांस, अंडा और शराब जैसी चीजों से भी धार्मिक व्रत के दौरान दूरी रखी जाती है। इसके अलावा बहुत अधिक तला-भुना, मसालेदार और भारी भोजन करने से बचने की सलाह दी जाती है।

हर व्रत के नियम एक जैसे नहीं होते

यह समझना जरूरी है कि सभी व्रतों में खान-पान के नियम समान नहीं होते। नवरात्रि, एकादशी और जन्माष्टमी जैसे व्रतों की अपनी अलग-अलग परंपराएं हो सकती हैं। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार या दिन में एक बार भोजन करते हैं।

इसलिए व्रत रखने से पहले संबंधित व्रत की धार्मिक परंपरा और स्थानीय रीति-रिवाजों की जानकारी लेना बेहतर होता है। लंबे समय तक उपवास करने वाले या विशेष आहार संबंधी जरूरत वाले लोगों को अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों का भी ध्यान रखना चाहिए।

व्रत में भोजन से ज्यादा जरूरी है संयम

व्रत को धार्मिक मान्यताओं में आत्मसंयम, सादगी और भक्ति से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए व्रत के दौरान क्या खाना है, इसके साथ यह समझना भी जरूरी है कि इसका उद्देश्य केवल पेट खाली रखना नहीं है।

सात्विक और सीमित भोजन, संयमित दिनचर्या और धार्मिक आस्था के साथ व्रत को पूरा करने की परंपरा भारतीय संस्कृति में लंबे समय से चली आ रही है।