वॉशिंगटन: नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 3,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं। संकट की इस घड़ी में अमेरिका ने नेपाल के लिए 36 लाख डॉलर से अधिक की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है।
अमेरिका की ओर से दी जाने वाली सहायता में आपदा प्रभावित 10,000 तक परिवारों के लिए आपातकालीन खाद्य सामग्री शामिल है। अमेरिकी विदेश विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। नेपाल और चीन में स्थित अमेरिकी दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर अमेरिकी नागरिकों की मदद और राहत अभियान में सहयोग कर रहे हैं।
यह भयावह आपदा बुधवार को हिमालयी क्षेत्र में एक ग्लेशियर का हिस्सा टूटने के बाद आई। ग्लेशियर टूटने से बड़ी मात्रा में पानी और मलबा तेज गति से घाटियों की ओर बहा, जिससे नेपाल-तिब्बत सीमा से सटे इलाकों में भारी नुकसान हुआ।
आपदा की चपेट में विदेशी नागरिक भी आए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, लापता लोगों में करीब 100 अमेरिकी नागरिक शामिल हैं। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक देश में कुल 589 विदेशी नागरिकों के लापता होने की सूचना मिली है। वहीं, नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार अब तक 261 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।
लापता लोगों की तलाश और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव अभियान जारी है। सुरक्षा बलों के अलावा हेलीकॉप्टर और आपातकालीन दल भी अभियान में जुटे हैं। हालांकि, दुर्गम पहाड़ी इलाकों, खराब मौसम और बाढ़ से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण राहत एवं बचाव कार्यों में लगातार चुनौतियां सामने आ रही हैं।
बाढ़ के बाद हजारों लोगों को भोजन, सुरक्षित आश्रय, चिकित्सा सुविधा और अन्य जरूरी सामान की तत्काल आवश्यकता है। ऐसे में अमेरिका की आर्थिक और मानवीय सहायता नेपाल में पैदा हुए गंभीर मानवीय संकट से निपटने के लिए चल रहे अंतरराष्ट्रीय राहत प्रयासों को मजबूती देगी।







