मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के मराठी भाषा संबंधी आदेश पर रोक लगाने की मांग करने वाली चार कैब ड्राइवरों की याचिका शनिवार को खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए एक साल अतिरिक्त समय देने का फैसला किया गया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की पीठ के समक्ष अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा सीखने की निर्धारित समयसीमा को एक वर्ष बढ़ा दिया गया है। अदालत ने सरकार के इस बयान को स्वीकार करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
फडणवीस सरकार ने बढ़ाई समयसीमा
यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से गुरुवार को एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद समयसीमा बढ़ाने की घोषणा के बाद आया। सरकार के इस फैसले से गैर-मराठी ड्राइवरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई का खतरा फिलहाल टल गया है और उन्हें भाषा सीखने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।
ड्राइवरों ने मौलिक अधिकारों का दिया हवाला
चार कैब ड्राइवरों ने वकील विवेक शुक्ला के माध्यम से जनहित याचिका दायर कर 12 अगस्त के सरकारी नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी। याचिका में दावा किया गया था कि मराठी भाषा की अनिवार्यता से उनके संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
याचिकाकर्ताओं मो. कासिम अहमद, मो. तौसीफ शेख, सियाद अहमद और सादिक नासिर अली खान ने तर्क दिया था कि मोटर वाहन अधिनियम में ड्राइविंग लाइसेंस या संबंधित बैज के लिए किसी विशेष भाषा की जानकारी को अनिवार्य योग्यता नहीं बनाया गया है।
आजीविका प्रभावित होने की जताई थी आशंका
याचिका में कहा गया था कि मराठी की ‘कामकाजी जानकारी’ से जुड़े नियम लागू होने की स्थिति में बड़ी संख्या में गरीब और प्रवासी ड्राइवरों के बैज निलंबित होने या परमिट रद्द होने का खतरा पैदा हो सकता है। ड्राइवरों का कहना था कि इससे उनकी आजीविका सीधे प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, सरकार की ओर से समयसीमा एक साल बढ़ाए जाने की जानकारी दिए जाने के बाद हाई कोर्ट ने मामले में आगे हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और याचिका का निपटारा कर दिया।







