नयी दिल्ली: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने दलितों के साथ कथित भेदभाव के मुद्दे पर कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले लोगों को यह बताना चाहिए कि समाज में भेदभाव की स्थिति अब भी क्यों बनी हुई है।
राहुल गांधी की ओर से जातिगत भेदभाव और उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान को लेकर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए पासवान ने कहा कि दलितों के साथ भेदभाव आज भी चिंता का विषय है, लेकिन इस सवाल का जवाब उन लोगों को भी देना चाहिए जिन्हें देश ने लंबे समय तक शासन का अवसर दिया।
पासवान ने कहा कि अगर इतने लंबे समय तक शासन के बावजूद सामाजिक स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया, तो इसके कारणों पर भी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार दलितों से जुड़े मुद्दों को लेकर गंभीर है और कई स्तरों पर अपना रुख स्पष्ट करती रही है।
आरक्षण को लेकर चिराग पासवान का रुख
केंद्रीय मंत्री ने आरक्षण के मुद्दे पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका आधार सामाजिक भेदभाव रहा है और इसे केवल आर्थिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण के संवैधानिक आधार को बदलने की मांग करने वालों को संसद में आकर अपना प्रस्ताव रखना चाहिए।
पासवान ने कहा कि यदि कोई संवैधानिक आधार में बदलाव की मांग करता है, तो उसे संसद के मंच पर यह प्रस्ताव रखना चाहिए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत इस पर चर्चा होनी चाहिए।
हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ मामले पर सियासत तेज
इससे पहले राहुल गांधी ने हल्द्वानी में खरगे की रैली के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम को लेकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस तरह की घटनाएं छुआछूत की मानसिकता को दर्शाती हैं और ऐसी गतिविधियां कानून तथा संविधान की भावना के खिलाफ हैं।
राहुल गांधी ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी। चिराग पासवान की ताजा प्रतिक्रिया के बाद दलित अधिकार, आरक्षण और कथित सामाजिक भेदभाव के मुद्दे पर कांग्रेस और एनडीए के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।







