रांची: भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन नजदीक आते ही झारखंड की राजधानी रांची के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। सावन पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले इस त्योहार को लेकर बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधने की तैयारियों में जुट गई हैं।
शहर के अपर बाजार समेत प्रमुख बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पारंपरिक से लेकर फैंसी राखियों की बड़ी रेंज उपलब्ध है। दुकानों पर 50 पैसे से लेकर 2500 रुपये तक की राखियां बिक रही हैं। इनमें धागे वाली पारंपरिक राखियों के अलावा मेटल, ज्वेलरी और आकर्षक डिजाइन वाली फैंसी राखियां भी ग्राहकों को खूब पसंद आ रही हैं।
रक्षाबंधन को लेकर राखियों के साथ कपड़े, मिठाई और गिफ्ट आइटम की खरीदारी भी तेज हो गई है। ऑनलाइन शॉपिंग का चलन बढ़ने के बावजूद रांची के बाजारों में ग्राहकों की अच्छी भीड़ देखने को मिल रही है।
कारोबारियों को बेहतर बिक्री की उम्मीद
अपर बाजार के राखी कारोबारियों का कहना है कि इस बार पिछले वर्ष की तुलना में कारोबार बेहतर रहने की उम्मीद है। ऑनलाइन बाजार के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अपनी पसंद की राखी खरीदने के लिए बाजार पहुंच रहे हैं।
राखी खरीदने पहुंची सुमिता ने कहा कि ऑनलाइन खरीदारी के बजाय बाजार में जाकर अपनी पसंद की राखी चुनने का उत्साह अलग होता है। उन्होंने कहा कि समय के साथ राखियों के डिजाइन में भी काफी बदलाव आया है और अब पारंपरिक राखियों के साथ मेटल और ज्वेलरी वाली फैंसी राखियां भी खूब पसंद की जा रही हैं।
महिला समूहों की राखियों की भी मांग
व्यापारियों के मुताबिक, कोलकाता और दिल्ली से आने वाली राखियों के अलावा झारखंड के अलग-अलग शहरों में महिला समूहों द्वारा तैयार की गई राखियों की भी अच्छी मांग है। त्योहार के चलते कपड़े, मिठाई और उपहारों के कारोबार में भी तेजी आने की उम्मीद है।
कारोबारियों का अनुमान है कि रक्षाबंधन के दौरान झारखंड में 100 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो सकता है।
झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष आदित्य मलहोत्रा ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे त्योहार सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने के साथ बाजार में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देते हैं। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर देशभर में करीब 40 से 50 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ने के साथ त्योहार मनाने के तौर-तरीकों में भी बदलाव आया है। पहले राखी मुख्य रूप से धागे से बने रक्षा सूत्र तक सीमित थी, लेकिन अब मेटल, फैंसी डिजाइन और ज्वेलरी वाली राखियों ने बाजार में अपनी खास जगह बना ली है।







