उज्जैन: रक्षाबंधन पर्व को लेकर श्री महाकालेश्वर मंदिर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। परंपरा के अनुसार, रक्षाबंधन के अवसर पर सबसे पहले राजाधिराज भगवान महाकालेश्वर को राखी अर्पित की जाएगी। श्रावण मास के अंतिम दिन भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत अभिषेक और विशेष शृंगार किया जाएगा।
रक्षाबंधन के दिन तड़के होने वाली भस्म आरती में भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद सूखे मेवों और भांग से बाबा महाकाल का विशेष शृंगार होगा। पुजारी परिवार की महिलाओं द्वारा तैयार की गई करीब दो फीट लंबी विशेष राखी भी बाबा को अर्पित की जाएगी।
परंपरा के मुताबिक, पुजारी परिवार की महिलाएं हर वर्ष भगवान महाकाल के लिए विशेष रक्षासूत्र तैयार करती हैं। इस बार राखी को रेशम के धागों, स्पंज, आभूषणों और विशेष वस्त्रों से सजाया जा रहा है। इसे तैयार करने में करीब आठ दिन का समय लगता है। इस दौरान महिलाएं श्रावण मास के उपवास और मंगल गीतों के बीच श्रद्धा एवं पवित्रता के साथ राखी तैयार करती हैं।
मान्यता है कि भगवान महाकाल कालजयी हैं और भद्रा या मुहूर्त के बंधन से परे हैं। इसी आस्था के चलते सबसे पहले बाबा महाकाल को राखी अर्पित कर सृष्टि के कल्याण की कामना की जाती है।
रक्षाबंधन और श्रावण महोत्सव के समापन के अवसर पर बाबा महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग भी लगाया जाएगा। पंडित राजेश शर्मा, पंडित ओम गुरु और पंडित आकाश सहित पुजारी परिवार इस आयोजन की तैयारियों में जुटा है।
सवा लाख लड्डुओं के निर्माण के लिए करीब 15 क्विंटल बेसन, 10 क्विंटल शुद्ध घी, 15 क्विंटल शक्कर बूरा और दो क्विंटल मेवे के साथ इलायची का इस्तेमाल किया जा रहा है। लड्डुओं के निर्माण में सामग्री की शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
28 अगस्त को भस्म आरती के दर्शन करने वाले और दिनभर बाबा महाकाल के दरबार में पहुंचने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को सवा लाख लड्डुओं का महाप्रसाद वितरित किया जाएगा। मंदिर परिसर में रक्षाबंधन के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन भी होंगे।
जिन महिलाओं और बहनों के भाई नहीं हैं, वे भी बाबा महाकाल को अपना भाई मानकर मंदिर पहुंचेंगी और उन्हें रक्षासूत्र बांधेंगी। इस विशेष परंपरा और आस्था के चलते रक्षाबंधन के दिन महाकाल मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।







