इंदौर: रक्षाबंधन के अवसर पर शून्य भुखमरी (एसडीजी-2), गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (एसडीजी-4) और स्वच्छ ऊर्जा (एसडीजी-7) के लिए काम करने वाली संस्था ‘2030 का भारत’ ने ‘लेट्स रीडिफाइन रक्षा’ नाम से नया कैंपेन फिल्म लॉन्च किया है। अभियान में सुरक्षा के पारंपरिक विचार को नए नजरिए से पेश करते हुए सशक्तिकरण को वास्तविक ‘रक्षा’ का रूप बताया गया है।
कैंपेन फिल्म की शुरुआत राखी बांधने के दृश्य से होती है। इसके बाद एक युवा महिला को कार्यालय में बैठक का नेतृत्व करते और आत्मविश्वास के साथ शहर की सड़कों पर चलते हुए दिखाया गया है। फिल्म का संदेश है कि किसी व्यक्ति को सीमाओं में बांधकर रखना सुरक्षा नहीं है, बल्कि उसे शिक्षा, अवसर और सम्मान देकर आत्मनिर्भर बनाना ही सच्ची रक्षा है।
‘2030 का भारत’ के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा कि रक्षाबंधन सुरक्षा और स्नेह का प्रतीक है। उनके अनुसार, संस्था के लिए सुरक्षा का वास्तविक अर्थ लोगों को आगे बढ़ने के अवसर देना है। उन्होंने कहा कि कक्षाओं, स्ट्रीट वेंडर्स और जरूरतमंद समुदायों के साथ काम करने के दौरान यह अनुभव हुआ कि सबसे मजबूत सुरक्षा वही है, जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने की क्षमता प्रदान करे।
संस्था के मुताबिक, नया अभियान उसकी जमीनी पहलों से भी जुड़ा है। ‘टीचर्स एम्पावरमेंट प्रोग्राम’ के तहत अब तक 1,200 से अधिक सरकारी स्कूल शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं, ‘प्रोजेक्ट अपलिफ्ट’ के जरिए 450 से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिली है।
‘2030 का भारत’ ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य लोगों को लंबे समय तक किसी पर निर्भर रखना नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। संस्था ने मीडिया, साझेदारों और नागरिकों से रक्षाबंधन के अवसर पर ‘रक्षा’ के अर्थ को नए सिरे से समझने और इस पहल का हिस्सा बनने की अपील की है।
संस्था के अनुसार, ‘2030 का भारत’ देशभर में शून्य भुखमरी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है। संस्था का दावा है कि उसकी विभिन्न पहलों के जरिए अब तक 25,000 से अधिक बच्चों और परिवारों तक पहुंच बनाई जा चुकी है।







