Betul faces setback on its path to becoming a sports hub, with no state-level school competitions in the 2026-27 session.

बैतूल: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में खेल सुविधाओं के विस्तार और जिले को खेलों का हब बनाने की कोशिशों के बीच शालेय खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के सत्र 2026-27 के खेल कार्यक्रम में बैतूल को एक भी राज्य स्तरीय शालेय प्रतियोगिता की मेजबानी नहीं मिली है।

प्रदेश में इस सत्र के दौरान 83 खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 आयु वर्ग में बालक-बालिकाओं की स्पर्धाएं शालेय स्तर से शुरू होकर ब्लॉक, जिला, संभाग और राज्य स्तर तक पहुंचेंगी। राज्य स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए मध्यप्रदेश की टीम में चुना जाता है।

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संयुक्त संचालक लोक शिक्षण, नर्मदापुरम संभाग द्वारा जारी खेल पंचांग में बैतूल को राज्य स्तरीय आयोजन की जिम्मेदारी नहीं दी गई है। इसका सीधा असर जिले के खिलाड़ियों पर पड़ सकता है, जिन्हें राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए दूसरे जिलों की यात्रा करनी होगी।

संभागीय स्तर पर भी बैतूल को नर्मदापुरम और हरदा की तुलना में कम आयोजन मिले हैं। बैतूल में 20, हरदा में 23 और नर्मदापुरम में 37 प्रतियोगिताएं प्रस्तावित हैं। वहीं पाथाखेड़ा में एथलेटिक्स की तीन प्रतियोगिताएं आयोजित किए जाने की योजना है।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मैदान पर खेलने से खिलाड़ियों को परिचित वातावरण और दर्शकों के समर्थन का लाभ मिलता है। इससे उनके आत्मविश्वास और प्रदर्शन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

बैतूल में हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ, स्वीमिंग पूल, बैडमिंटन, फुटबॉल, क्रिकेट, वॉलीबाल, बास्केटबाल और हैंडबाल जैसी खेल सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे में खेल प्रेमियों का कहना है कि इन संसाधनों का बड़े आयोजनों के लिए बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी मिलने से स्थानीय खिलाड़ियों को उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा का अनुभव भी मिल सकता था।