वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के थिएटर सेल ‘रंगशाला’ ने दर्शकों की मांग और उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया को देखते हुए म्यूजिकल नाटक ‘सत्य हरिश्चंद्र’ का पुनर्मंचन किया। पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में आयोजित इस प्रस्तुति में भारतीय लोकनाट्य परंपरा और आधुनिक रंगमंच का प्रभावी संगम देखने को मिला।
परफॉर्मिंग आर्ट्स फैकल्टी और कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, फ्रेस्नो के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम का निर्देशन कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी के कम्युनिकेशन प्रोफेसर और सातवीं पीढ़ी के ‘सांगीत’ कलाकार प्रो. देवेंद्र शर्मा ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत देवी सरस्वती, पंडित ओंकारनाथ ठाकुर और महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। इस अवसर पर डीन ऑफ स्टूडेंट्स प्रो. रंजन कुमार सिंह और आर्ट्स फैकल्टी की डीन प्रो. सुषमा घिल्डियाल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
रंगशाला के समन्वयक प्रो. संजय कुमार ने कहा कि सांगीत, स्वांग और नौटंकी जैसी लोकनाट्य शैलियां संगीत, कविता, अभिनय और नृत्य का अनूठा मेल हैं। इन परंपराओं से युवा पीढ़ी को जोड़ना और इन्हें नए रूप में आगे बढ़ाना रंगशाला का प्रमुख उद्देश्य है।
नाटक में ईमानदारी, नैतिक साहस, त्याग और विपरीत परिस्थितियों में अपने मूल्यों पर कायम रहने जैसे संदेशों को प्रमुखता दी गई। पारंपरिक नौटंकी शैली को बरकरार रखते हुए प्रस्तुति में आधुनिक मंचीय तकनीक और प्रभावी अभिनय का समावेश किया गया।
इस प्रस्तुति की खास बात विभिन्न राज्यों से आए विद्यार्थियों की भागीदारी रही। असम, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और पुडुचेरी समेत कई राज्यों के छात्रों ने अभिनय किया, जिससे मंच पर विविध भारतीय संस्कृतियों की झलक दिखाई दी।







